फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीनों बहनों की हुई थी हत्या, मजिस्ट्रेटी रिपोर्ट में भी यही सच

Mon, 17 Apr 2017 12:57 AM IST
मोहसिन पासा, बरेली
विज्ञापन
The secret of the four deaths in Sanjana - फोटो : बरेली, अमर उजाला
विज्ञापन
मीरगंज तहसील के सैंजना कांड में पुलिस की आत्महत्या की थ्योरी को मजिस्ट्रेटी जांच ने पूरी तरह से नकार दिया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि तीनों बहनों की हत्या हुई थी और अगर गांव के दो लोगों से पुलिस ठीक  से पूछताछ करती तो रहस्य से पर्दा उठ सकता था। हैरत यह है कि यह रिपोर्ट छह महीने पहले ही एसडीएम ने तैयार कर एडीएम को सौंप दी थी लेकिन इस रिपोर्ट का संज्ञान अबतक नहीं लिया गया। पुलिस तो पहले ही दिन से इस कांड को आत्महत्या बनाने पर तुली थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाकर साफ कर दिया था कि यह आत्महत्या थी और फाइल लगभग क्लोज कर दी गई थी। घरवालों के हंगामा मचाने पर ही तत्कालीन जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेटी जांच बैठा दी थी जिसका सच बाहर आने के बाद भी परिजनों को न्याय अबतक नहीं मिला। हैरत है कि इस कांड की सच्चाई तक पहुंचने के बाद भी लापरवाही दर लापरवाही अबतक हो रही है। कुछ दिनों पहले लड़कियों के परिजनों मुख्यमंत्री योगी से मिले थे। वहां के निर्देशों के बाद कुछ हरकत पुलिस ने शुरू की है। 
विज्ञापन

26 अगस्त 2016 को सैंजना गांव में ऐसा सनसनीखेज मामला हुआ था जिससे सभी हिल गए थे। गांव की दो सगी बहनों और एक चचेरी बहन की नदी में लाश मिली थी। हालात तो साफ बता रहे थे कि उनकी हत्या हुई है लेकिन पुलिस मानने को तैयार नहीं थी। पुलिस आत्महत्या बता रही थी और पीएम रिपोर्ट भी पुलिस के मुताबिक ही डूबने से मौत होने की ओर इशारा कर रहा था। लिहाजा पुलिस आनन-फानन में केस क्लोज करने की तैयारी कर ली। मामले में नया मोड़ तब आ गया जब अगले ही दिन उस युवक की भी लाश मिली जिसपर बहनों की हत्या का शक घरवाले जता रहे थे। फिर भी पुलिस आत्महत्या ही कहती रही। तब घरवालों ने हंगामा मचाया तो तत्कालीन जिलाधिकारी गौरव दयाल ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए। 
क्या है रिपोर्ट में
मजिस्ट्रेटी जांच में कुल 11 लोगों के बयान हुए, कई दिनों तक गांव में रहकर एसडीएम अर्चना द्विवेदी पूछताछ की थी। बाद में निष्कर्ष में लिखा है कि हालात यही कह रहे हैं कि तीनों बहनों की हत्या हुई थी। ने साफ कह दिया कि तीनों लड़कियों की हत्या हुई है। गांव के ही छत्रपाल और सोमपाल का भी नाम खोलकर कहा कि इन लोगों के खौफ से कोई ग्रामीण मुंह नहीं खोल रहा है। पुलिस इन दोनों से फिर से गहनता से पूछताछ करे तथ्य सामने आ सकते हैं,। 2 नवंबर 2016 को एसडीएम मीरगंज अर्चना द्विवेदी ने मजिस्ट्रेटी जांच पूरी करके अगले दिन डीएम को भेज दिया। 5 नवंबर को डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच को परीक्षण के लिए एडीएम को भेज दिया।   
विज्ञापन


घरवाले न्याय के लिए योगी से भी मिले
एक अप्रैल को तीनों लड़कियों के पिता एसपी देहात के पास मिलने पहुंचे। पिंकी के पिता बेनीराम की तरफ से तहरीर देकर तीन लड़कियों की हत्या होने की बात कही गई। उनका आरोप था कि उनकी बेटी पिंकी, भतीजी शारदा और प्रीति को शौच जाते वक्त अगवा करके गला घोंटकर हत्या करने के बाद लाश को नदी में फेंका गया है। उन्होंने छत्रपाल, कुंवरपाल, राजेंद्र, सोनू और राजू पंडित पर हत्या करने का आरोप लगाया। पीड़ितों का आरोप है कि एसपी देहात ने उन्हें हड़काकर भगा दिया। कहने लगे ज्यादा मत भागो, तुम्हारे खिलाफ भी राजू के परिवार वालों की तहरीर आई थी। यहां से निराश होने के बाद दो अप्रैल को पीड़ितों ने जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपना दर्द सुनाया।

अब पुलिस आई हरकत में
सीएम ऑफिस से फोन आते ही बरेली के पुलिस अधिकारी हरकत में तो आ गए, लेकिन अभी तक हो कुछ नहीं पाया है। एसपी देहात के आदेश पर सीओ मीरगंज ग्रीश कुमार सिंह मामले की फिर से जांच कर रहे हैं। नए सिरे से जांच में उन्होंने तीनों लड़कियों के पिता के बयान दर्ज कर लिए हैं। सीओ का कहना है कि अभी गांव के और भी लोगों के बयान दर्ज करने हैं। इसके बाद वह रिपोर्ट एसपी देहात को सौंप देंगे। हालांकि मजिस्ट्रेटी जांच के बारे में इन्हें कुछ नहीं मालूम। 

यह था मामला
26 अगस्त 2016 की दोपहर बारह बजे थाना मीरगंज के सैंजना गांव के बेनीराम की 15 वर्षीय बेटी पिंकी, उनके सगे भाई की 13 वर्षीय बेटी प्रीति, चचेरे भाई ओमकार की 14 वर्ष की बेटी शारदा शौच को निकली थीं। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने तलाश किया, लेकिन नहीं मिल पाई थीं। 27 अगस्त को शारदा की लाश पहाड़पुर गांव के पास भाखड़ा नदी में मिली थी। उसकी नाक और कान में खून बह रहा था। इसके बाद शारदा से करीब दस किलोमीटर दूर प्रीति और पिंकी के शव धनेटा गांव के पास भाखड़ा नदी की झाड़ियों में मिल गए थे। दोनों लड़कियों के शवों की हालत बेहद खराब थी। ऐसा लग रहा था कि तेजाब डालकर लाश को जलाया गया हो। इसके अगले ही दिन शारदा के प्रेमी राजू की लाश गांव के पास ही मिल नदी किनारे मिली थी। राजू की लाश के पास कई तरह का कीटनाशक रखा मिला था। पुलिस ने चारों मौतों को हादसा बताकर निपटा दिया था। 

इंसाफ के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे
बेनीराम, महेंद्र पाल और ओमकार का कहना है कि इंसाफ के लिए वह आखिरी दम तक लड़ते रहेंगे। छत्रपाल और सोमपाल का हत्या में अहम रोल है। छत्रपाल से उनकी जमीन को लेकर रंजिश चल रही है। सोमपाल राजू का दोस्त था। छत्रपाल ने उसे अपने साथ मिला लिया। शराब का कारोबार करने की वजह से छत्रपाल का पुलिस में उठना-बैठना है। उसी ने उनकी बेटियों को अपहरण करने के अपने साथियों की मदद से हत्या करने के बाद नदी में फेंक दिया। सपा की सरकार में पुलिस ने उनकी बेटियों की हत्या का मामला दबा दिया। राजू को इसलिए मार दिया गया कि वह तीनों लड़कियों की हत्या का राज जानता था। अब वह आरोपियों को सजा दिलाकर रहेंगे।  

पुलिस तो तथ्यों के आधार पर विवेचना कर रही है। मजिस्ट्रेटी जांच अभी उन्हें नहीं मिली है। एडीएम(प्रशासन) जांच का परीक्षण कर रहे हैं। पोस्टमार्टम में तीनों लड़कियों की डूबने की मौत होने की बात सामने आई थी। जबकि राजू की जहर खाने से मौत होने की पुष्टि हुई थी। बेनीराम की तहरीर पर राजू आदि के खिलाफ शारदा और उसकी बहनों को बहला फुसलाकर ले जाने के आरोप में मुकदमा लिखा दिया था। राजू के पिता की तहरीर पर लड़कियों के परिवार वालों के खिलाफ मीरगंज थाने में मुकदमा लिखा दिया है। दोनों मुकदमों की विवेचना चल रही है। चारों के विसरे परीक्षण के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिए गए हैं। वहां से रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी-यमुना प्रसाद, एसपी देहात

-सैंजना प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच के बारे में पता कराया जा रहा है। मैंने अभी अपने स्टेनों से जांच के बारे में पूछा है। वह सही जानकारी नहीं दे पाए। छुट्टी पर हूं। लौटकर आने के बाद जांच का परीक्षण करके पुलिस को भेज दिया जाएगा- एसपी सिंह, एडीएम(प्रशासन)  
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें