दो साल पहले एक विधायक को आधी रकम बतौर कमीशन लौटा देने का झांसा देकर स्कूल प्रबंधक ने उनकी निधि से 18 लाख रुपये की धनराशि झटक ली। जिस स्कूल की चहारदीवारी के निर्माण या फर्नीचर खरीदने के नाम पर विधायक निधि ली गई, प्रबंधक ने उस स्कूल की जमीन ही बेच दी और नैनीताल रोड पर जमीन खरीदकर नया स्कूल खोल लिया और उसी पर विधायक निधि का पैसा भी खर्च कर लिया। हिस्सा न मिलने से खिसियाए विधायक ने अपनी ही सरकार में अफसरों पर प्रबंधक से रिकवरी का दबाव बनाया तो अफसरों ने आदेश भी कर दिए। रकम जमा न करने पर प्रबंधक की आरसी काट दी गई मगर वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे ले आए। अब कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए डीएम और सीडीओ से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई चार जनवरी को होगी। इस मामले में सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मामला पूर्व विधायक और प्रबंधक के बीच का है, मगर प्रशासन के अफसरों को जवाब देना पड़ रहा है।
वर्ष 2015 की तत्कालीन सपा सरकार में विधायक और प्रबंधक के बीच स्कूल में फर्नीचर खरीदने, लाइब्रेरी बनाने और अन्य निर्माण कार्यों में विधायक निधि देने के लिए डीआरडीए के बाबुओं के माध्यम से डील हुई। निधि में से 50 फीसदी हिस्सा बतौर कमीशन देने की शर्त पर डील फाइनल हो गई। डील कराने वाले बाबू ने भी प्रबंधक से अपना हिस्सा तय कर लिया। सूत्रों की मानें तो स्कूल प्रबंधक ने विधायक को उनके हिस्से की आधी रकम एडवांस न देकर कहा कि वह नैनीताल रोड पर जमीन खरीद रहे हैं, विधायक चाहे तो उसमें पार्टनर बन सकते हैं। बताया जाता है कि दोनों के बीच इस पर सहमति बन गई, मगर हिस्सा न देने पर पूर्व विधायक ने प्रबंधक को घर पर बुलाकर धमकाया, लेकिन प्रबंधक झांसा देकर निकल गए। फिर उनके हत्थे नहीं आए। इसी बीच उन्होंने डीआरडीए बाबुओं से मिलकर विधायक निधि से18 लाख की रकम निकाल ली। डीआरडीए बाबू ने मौके पर जाकर सत्यापन नहीं करने दिया। अफसरों का कहना है कि प्रबंधक ने जिस स्कूल के लिए 18 लाख की विधायक निधि ली थी, वह जमीन बेच दी और नया स्कूल खोलकर वह रकम उसमें खर्च कर ली। हालांकि प्रबंधक इस बात से इनकार कर रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक दबाव में तत्कालीन अफसरों ने विधायक निधि की रकम की रिकवरी के आदेश कर दिए और प्रबंधक की आरसी काट दी और विधायक निधि ब्याज समेत वसूली का दबाव बनाने लगे। हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद यह मामला पेंडिंग में रहा। हाल ही में उच्च न्यायालय ने इस मामले को संज्ञान लेकर डीएम, सीडीओ के अलावा तहसीलदार से भी जवाब मांगा है।
बाबुओं पर लटकी तलवार
अफसरों ने न्यायालय के नोटिस पर डीआरडीए के संबंधित बाबुओं से स्पष्टीकरण मांगा। बाबुओं से पूछा गया कि वह कोर्ट में समय से डीआरडीए का पक्ष क्यों नहीं रख पाए। इसमें कानूनी मामले देखने वाले बाबू पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है। हालांकि उसका कहना है कि जब विधायक निधि की फाइल पटल देखने वाले दूसरे बाबू के पास थी तो वह कैसे अपना पक्ष रखते। विधायक निधि देखने वाले बाबू से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
कोट--
मुझे विधायक निधि से जितनी रकम मिलनी थी, उससे बहुत कम मिली। सपा सरकार में अफसरों ने विधायक के दबाव में मुकदमा दर्ज करवाकर आरसी कटवा दी। वह मुझसे 50 लाख का बकाया बताकर वसूली करना चाहते थे। इसीलिए मुझे हाईकोर्ट जाना पड़ा। उस समय के सब अफसर विधायक की ही भाषा बोल रहे थे। मैं बाहर से लौटकर पूरी बात बताऊंगा। उल्टे-सीधे काम करने वालों को सजा तो मिलेगी ही। - प्रबंधक, निजी स्कूल
कोट--
पूर्व विधायक की निधि से 18 लाख रुपये देने के मामले में हमें चार जनवरी को न्यायालय में जवाब देना है। यह मामला पूर्व विधायक और प्रबंधक के बीच है लेकिन जवाब हमें देना पड़ रहा है। -सत्येंद्र कुमार, सीडीओ