बीडीए के साथ तत्कालीन चकबंदी अफसरों की भूमिका पर भी उठे सवाल
बरेली। नरियावल में 113 निजी तालाब पाटकर इंटरनेशनल सिटी को विकसित कराने के मामले में बीडीए के साथ चकबंदी अफसरों की भी सांठगांठ साफ होती जा रही है। चकबंदी के अफसरों ने इस टाउनशिप के लिए चकबंदी की प्रक्रिया जारी होने के बावजूद एनओसी जारी कर दी थी, उधर बीडीए के अफसरों ने भी तलपट मानचित्र मंजूर करने से पहले कोई जांच नहीं कराई। कमिश्नर की जांच में यह खुलासा होने के बाद अब खलबली मची हुई है।
अवैध रूप से टाउनशिप विकसित किए जाने के मामले में 13 अगस्त 2019 को शासन को शिकायत भेजी गई थी जिसके बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद की जांच में कई और खुलासे हुए हैं। इसमें बीडीए और चकबंदी अधिकारी दोनों फंस रहे हैं। जांच रिपोर्ट में साफ हो चुका है कि सदर तहसील के 18 गाटाओं के निजी तालाबों को तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी नजरुल इस्लाम ने चकों में बदल दिया था। बाद में बीडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने भी टाउनशिप का 101 गाटा नंबरों पर 100829.45 वर्गमीटर जैसे विशाल क्षेत्रफल में तलपट मानचित्र स्वीकृत करते वक्त चकबंदी विभाग से कोई अनुमति नहीं ली जबकि जिस जगह टाउनशिप विकसित की जा रही थी, उन गांवों में चकबंदी चल रही थी।
कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक बीडीए अधिकारियों को खुद भी जांच करानी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी वजह से तत्कालीन बीडीए वीसी, चीफ इंजीनियर, टाउन प्लानर सहित अन्य अफसरों की भूमिका की जांच की जा रही है। बीडीए वीसी दिव्या मित्तल की ओर से टाउनशिप बना रहे बिल्डर को 21 दिन का वक्त देकर जवाब मांगा जा चुका है।
चकबंदी के तत्कालीन अधिकारियों की एनओसी के बाद नक्शा पास किया गया था। हालांकि इस मामले में कमिश्नर की जांच के आधार पर ही कार्रवाई होगी। बिल्डर से तीन हफ्ते के अंदर पहले साक्ष्य मांगे गए हैं। -दिव्या मित्तल, बीडीए वीसी