बरेली। पैगंबर-ए-इस्लाम की शान में गुस्ताखी होती है। कभी कुरान की बेहुरमती की जाती है। मस्जिद, मदरसों, मजारों पर हमले करके मुसलमान के पैमाने को नापा जाता है। नौजवान भीड़ हिंसा का शिकार हो रहे हैं। हमें हर तरह से उकसाया जा रहा है। अब इस पर चुप नहीं बैठा जा सकता। मुसलमानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हुकूमत की है। देश को आजाद करने में मुसलमानों का भी बहुत बड़ा योगदान है। ये बातें गुजरात से आए मुफ्ती सैयद सलाम बाबू ने कहीं।
वह शनिवार को मथुरापुर स्थित जमीयतुर्रजा में आयोजित उर्स-ए-रजवी के मंच से खिताब कर रहे थे। दरगाह ताजुश्शरिया के सज्जादानशीन काजी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी की सरपरस्ती में आयोजित तकरीरी जलसे को खिताब करते हुए रामपुर के शहर काजी मुफ्ती फैजान मियां ने कहा कि जिस दिल में आला हजरत हैं, उसमें नफरत और दहशतगर्दी नहीं हो सकती। आला हजरत की तालीम हमें सिखाती है कि हर मजहब का सम्मान करो, कमजोर की मदद करो और देश से मोहब्बत करो।
दोपहर 2:38 बजे सरकार आला हजरत के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातेहा कारी शर्फोद्दीन और कारी फैजू नबी ने और शिजरा अल्लामा मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा ने पढ़ा। काजी-ए-हिंदुस्तान ने देश की तरक्की के लिए खुसूसी दुआ की। इससे पहले सुबह मदरसा जामियातुर्रजा में कुरान ख्वानी हुई और नात-ओ-मनकबत की महफिल सजी। सुबह 10 से कारी शर्फउद्दीन ने कुरान की तिलावत से कार्यक्रम का आगाज किया।
मंच पर हुस्साम मियां, हुम्माम मियां, मुफ्ती शमशाद हुसैन, अख्तर हुसैन आलिमी, अब्दुल मुस्तफा राधोल्वी, शाहजाद आलम, आशिक, नश्तर फारूकी, अफजाल आदि मौजूद रहे। प्रवक्ता समरान खान ने सभी सहयोगियों का शुक्रिया अदा किया।