बरेली। हेलमेट के बिना दोपहिया वाहन चलाने से हादसों में लोगों की जान जा रही है। जान बचने पर भी सिर की चोट जीवनभर का दर्द दे रही है। ऐसे में अमर उजाला ने हेलमेट जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसी के तहत शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में संबंधित विभागों के अधिकारियों, व्यापारियों, समाजसेवियों, शिक्षकों व नागरिकों ने समाधान पर मंथन किया। सभी ने जन जागरण में मदद का वादा किया। समाजसेवियों ने कहा कि सभी प्रमुख धर्माचार्यों के जरिये धर्मस्थलों से लोगों को हेलमेट जागरूकता का संदेश दिया जाएगा।
ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने कहा कि जिस तरह हम बच्चों को पैर छूने का संस्कार देते हैं, उसी तरह उन्हें हेलमेट की जरूरत भी बतानी चाहिए। रामकृष्ण शुक्ला ने कहा कि वह विद्यालय संचालित करते हैं। विद्यार्थियों को बताते हैं कि जिस तरह स्कूल बैग नहीं भूलते, वैसे हेलमेट न भूलें। अभिभावकों को भी समझाएं। राजीव यादव ने कहा कि यातायात पुलिस सिफारिश पर लोगों को छोड़ देती है, यह लचीलापन नुकसान कर रहा है।
समाजसेवी अश्विनी ओबराय ने बताया कि सप्ताह में एक दिन अचानक संस्थानों के गेट पर चेकिंग हो। बिना हेलमेट वाले विद्यार्थियों को लौटा दिया जाए। कई धर्मस्थलों के प्रमुख संपर्क में हैं। वह प्रार्थना के दौरान उनसे अभियान के बारे में अपील कराएंगे। प्रधानाचार्य शिवलेश चंद्र पांडेय ने कहा कि मां बच्चे की पहली गुरु होती है। मातृशक्ति के जरिये हेलमेट की जरूरत बताई जाए। शव दफन कराने वाली संस्था के प्रमुख अजय अग्रवाल ने बताया कि कई लोग हादसों में सिर की चोट से मर जाते हैं। ऐसे लावारिस शवों को वह पुलिस की मदद से दफन कराते हैं। सोचते हैं कि इस शख्स ने हेलमेट लगाया होता तो शायद उसकी जान बच जाती और पहचान भी हो जाती। ब्यूरो