बरेली। शहर में जलनिकासी का सिस्टम फेल है। पहले से बने नाले चोक हैं। प्रस्तावित नाले अब तक धरातल पर नहीं उतरे हैं। यही वजह है कि सोमवार को हुई 86 मिमी बारिश में ही शहर के कई इलाके डूब गए। व्यवस्थाएं बदतर हो गईं।
पशुपतिनाथ मंदिर, वनखंडीनाथ मंदिर नाथ सहित अन्य शिवालयों के लिए जाने वाले मार्गों पर जलभराव की वजह से कांवड़ियों के साथ ही जलाभिषेक के लिए जाने वाले अन्य श्रद्धालुओं को भी परेशानी हुई। कई लोग गिरे तो कुछ के वाहन बंद हो गए। दिनभर यहां से निकलना दूभर रहा।
निचले इलाकों के साथ ही पॉश कॉलोनियों का भी बुरा हाल रहा। मुंशीनगर, जगतपुर, सैलानी, सुरेश शर्मा नगर, चाहबाई, मलूकपुर, सुभाषनगर समेत शहर के कई हिस्सों में सोमवार को दिन भर जलभराव रहा। सुभाषनगर में खन्ना बिल्डिंग के पीछे, सैदुपर हॉकिन्स की बालाजी विहार कॉलोनी और जसौली प्राथमिक विद्यालय के आसपास जलभराव होने से पता नहीं लग रहा था कि नाला कहां हैं और सड़क कहां।
बाहर निकलने पर गिरने के डर से लोग घरों में ही रहे। सीएम ग्रिड के तहत चल रहे निर्माण कार्य की वजह से डीडीपुरम और एकतानगर में हाल और बुरा रहा। ब्यूरो
सूरतेहाल :
मढ़ीनाथ मंदिर परिसर में गंदा पानी भरा रहा। वनखंडीनाथ, तपेश्वरनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए कांवड़ियों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा।
हजियापुर और तिलक कॉलोनी के घरों में पानी घुस गया।
स्टेडियम रोड की रेजीडेंसी कॉलोनी तालाब बन गई। भरतौल मार्ग, राजेंद्रनगर और डेलापीर की सड़कों पर भी जलभराव रहा।
साहू गोपीनाथ डिग्री कॉलेज के सामने मठ की चौकी इलाके में सड़क पर एक फुट तक पानी भर गया।
सुभाषगर पुलिया और इज्जतनगर अंडरपास में जलभराव से आवागमन बंद रहा।
डेलापीर में ट्रांसफर स्टेशन से कूड़ा सड़क पर आ गया। झूलेलाल द्वार की ओर जलभराव की वजह से यहां जाम लगा रहा।
लाल फाटक पुल से उतरते ही बदायूं रोड की ओर सड़क पर पानी भरने से दोपहिया वाहन बंद हो गए। आवागमन दिन भर प्रभावित रहा।
सैलानी और जगतपुर पानी की टंकी वाले मार्ग पर जलभराव की वजह से दो घंटे तक लोग घरों से निकल नहीं पाए। सुरेश शर्मा नगर के मार्ग पर भी आवागमन प्रभावित हुआ।
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अफसर कार्ययोजना बनाते रहे... लोग भुगत रहे खामियाजा
मानसून से पहले नगर निगम और जल निगम के अधिकारी जलभराव से निपटने की कार्ययोजना बनाते रहे। एस्टीमेट तैयार करके समाधान की उम्मीद जगाई गई मगर धरातल पर काम नहीं हुआ। इसका खामियाजा अब लोग भुगत रहे हैं। सोमवार को छोटी विहार में घरों के भीतर तक पानी घुस गया जबकि इस मोहल्ले को जलभराव से राहत देने के लिए 64.12 करोड़ की लागत से नालों के निर्माण की तैयारी थी। बजट न मिलने से यहां काम ही शुरू नहीं हो पाया।
जिम्मेदारों की बात :
जल निगम नालों के निर्माण के एस्टीमेट तैयार कर भेज चुका है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, काम शुरू करा दिया जाएगा। - रघुवंश राम, परियोजना प्रबंधक, जल निगम की कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन डिवीजन
कुछ निचले हिस्सों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर जगह दो घंटे में पानी निकल गया। जहां जलभराव बार-बार होता है, वहां के लिए समाधान निकाला गया है। कुछ नए नाले बारिश के बाद बनेंगे और कुछ के लिए ड्रेनेज सिस्टम बनाने पर काम होगा। - उमेश गौतम, महापौर