बरेली। बरेली-सीतापुर हाईवे पर गोमती नदी के पुल में हुए गड्ढे ने इसके घटिया निर्माण की पोल खोल दी। पुल पर डाला गया कंक्रीट का लेंटर मजबूत होता तो कम से कम 50 वर्ष तक गड्ढा नहीं होता, पर मात्र आठ वर्ष में ही गड्ढा हो गया। स्पष्ट है कि निर्माण कमजोर था।
पुल का निर्माण करने के लिए 2011 में प्रोजेक्ट मंजूर हुआ। पुल 2014 में बना। प्रतिदिन 25 हजार वाहन इस पुल से गुजरते हैं। निर्माण करने वाली कंपनी को काली सूची में डाला जा चुका है। एफआईआर भी हो चुकी है। संचालन एनएचएआई के हाथ में है। अगर निजी संस्था काली सूची में न डाली गई होती तो निर्माण के 20 वर्ष बाद तक तक उसे ही संचालन करना था। अब जब घटिया निर्माण की कलई खुली तो कार्रवाई किस पर हो, यह सवाल भी उठ रहा है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर बीपी पाठक ने बताया कि उन्होंने रीजनल मैनेजर को मामले की जानकारी दी है। वहां से मिले निर्देश के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
ये थीं खामियां
पुल पर लोहे का जाल डाला गया, लेकिन उस पर कंक्रीट का मजबूत कवर नहीं बनाया गया। कंक्रीट की थोड़ी सी परत बिछाकर खानापूरी की गई। अभियंताओं की भाषा में कहें तो स्ट्रेंथिंग नहीं होने से पुल में गड्ढा हो गया। गड्ढे से नीचे तक नदी दिख रही है। तत्काल ध्यान नहीं दिया जाता तो हादसे भी हो सकते थे।
कोट
पुल की एक लेन बंद रहेगी। इसकी मरम्मत में 28 दिन लग जाएंगे। - बीपी पाठक, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई