मीरगंज। शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामीण समस्याओं के निस्तारण के लिए हर शुक्रवार को विकासखंड मीरगंज की ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपाल आयोजित की जाती है, लेकिन इस योजना की हकीकत शुक्रवार को मोहम्मदगंज और धंतिया ग्राम पंचायत में देखने को मिली। इस बीच यहां न तो सचिव मिले और न ही किसी विभाग का कोई कर्मचारी। ऊपर से पंचायत घर बंद मिला। बीडीओ ने यह हालत देख मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।
शुक्रवार सुबह 11 बजे जब खंड विकास अधिकारी आनंद विजय यादव और सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण आसिम अली ग्राम चौपाल की अध्यक्षता करने पहुंचे, तो पंचायत घर का दरवाजा बंद मिला। चौपाल स्थल पर न तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, न पंचायत सहायक, न आशा वर्कर, और न ही किसी अन्य विभाग का कोई कर्मचारी मौजूद था।
जानकारी के अनुसार ग्राम चौपाल के आयोजन का एजेंडा 26 सितंबर को ही सभी विभागों को भेज दिया गया था। बावजूद इसके न तो सचिव उपस्थित हुए और न ही अन्य कर्मी। इस लापरवाही पर बीडीओ ने नाराजगी जताते हुए ग्राम पंचायत मोहम्मदगंज के सचिव सुशील कुमार से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। बताया गया कि सुशील कुमार ने अवकाश का कोई आवेदन भी नहीं दिया था।
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बीडीओ आनंद विजय यादव ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि जिन विभागों के अधीनस्थ कर्मचारी चौपाल में अनुपस्थित रहे। उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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सचिव रहे अनुपस्थित, मांगा स्पष्टीकरण
धंतिया ग्राम पंचायत में भी सचिव श्वेता पाल के अनुपस्थित रहने पर एडीओ समाज कल्याण की अध्यक्षता में चौपाल का आयोजन किया गया। उन्होंने मौके पर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों का तुरंत निस्तारण भी किया। सचिव श्वेता पाल से भी बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीरगंज ब्लॉक की कई पंचायतों में सचिवों और कर्मचारियों की मनमानी चरम पर है। चौपाल जैसी योजनाएं, जो जनता की समस्याओं के समाधान के लिए चलाई जाती हैं। लापरवाह अधिकारियों की वजह से औपचारिकता बनकर रह गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसी लापरवाहियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।