दमखोदा ब्लाक की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के 1.57 करोड़ का घपला करने वालों का पत्ता तक नहीं हिला। जो जहां पर था, वहीं मिला। ग्राम पंचायत सचिवों के निलंबन की चिट्ठियां फाइलों में दबी रहीं। अब प्रशासनिक और विकास विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि जवाब मिल गया है, बहाल कर देंगे। यह तो जिले के एक ब्लाक की तस्वीर है, बाकी के 14 और ब्लाकों का भी ऐसा हाल है। सवाल यह है कि ‘आडिट’ सरकारी विभाग है, जिसे सरकार ने घपला और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाया है। उसी की रिपोर्ट को दर किनार करके सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
जिला पंचायतराज अधिकारी दिनेश सिंह का कहना है कि आडिट रिपोर्ट गलत है और जिस अवधि के घपले की बात कही गई है, उस अवधि में करन सिंह, नजरूल हसन सहित पांचों पंचायत कर्मी उन गांवों में तैनात नहीं थे। अब सवाल यह है कि यदि ऐसा था तो उनको निलंबित ही क्यों किया गया। निलंबन किया गया तो उनके निलंबन आदेश खंड विकास अधिकारियों के यहां क्यों नहीं भेजे गए। नियम है कि निलंबन के बाद जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें आरोपी को चार्जशीट थमाते हैं। उसके लिए जांच अधिकारी नामित होता है । आरोपी आरोपपत्र के आधार पर जांच अधिकारी को जवाब देता है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोषी होने पर दंड या फिर निर्दोष होने की स्थिति में सवेतन बहाली के आदेश होते हैं। यहां पर तो पंद्रह दिन तक निलंबन आदेश फाइलों में रखा रहा । बकौल, डीपीआरओ आरोपियों को निलंबन आदेश की प्रति जिले से ही थमा दी गई और अब उनका प्रत्यावेदन लेकर बहाल करने की तैयारी है।
ये हैं आरोप
दमखोदा ब्लाक की 64 ग्राम पंचायतों में तीन साल के दौरान मनरेगा के 9.23 करोड़ से कराए गए कामों में 1.57 करोड़ के गोल माल का खुलासा हुआ । इस राशि के कामों के आडिट टीम को समायोजन, लेखा व्यय, वाउचर, कार्य मापक आदि अभिलेख न दिखाना । पंचायत सचिव करन सिंह और नजरुल हसन को पूरे ब्लाक की 69 फीसदी धनराशि (6.40 करोड़) से 33 गांवों में मनरेगा के काम कराना। जबकि इतने ही गांवों में मात्र 31 फीसदी धनराशि (2.83 करोड़ ) से विकास कराना। इनके अलावा इसी ब्लाक के पंचायत सचिव बरकत खां, मोहम्मद बसीम और शशांक वर्मा को भी धनराशि के दुरुपयोग के आरोप में निलंबित किया गया है।
तो घपला करने वाले कर्मी कौन
डीपीआरओ का कहना है कि आडिट रिपोर्ट में जिन गांवों में घपला और अनियमितताओं का उल्लेख किया है। उस अवधि में ये नहीं बल्कि दूसरे कर्मचारी थे। यदि दूसरे कर्मचारी थे तो वो कौन हैं और उनके खिलाफ कब और क्या कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
कोट
‘निलंबित पंचायत सचिवों के प्रत्यावेदन मिल गए हैं। उनके प्रत्यावेदन से प्रतीत हुआ है कि आरोपों में दम नहीं है, इसीलिए उन्हें बहाल करने की तैयारी है। जल्द ही बहाल कर दिए जाएंगे।’ दिनेश सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी
‘पूरे मामले की डीपीआरओ से रिपोर्ट तलब की है। बकौल डीपीआरओ इन पंचायत सचिवों का गलत निलंबन हुआ है। आडिटर की रिपोर्ट में जिस अवधि में तैनाती का उल्लेख किया है, उस अवधि में ये पंचायत सचिव तैनात नहीं थे। मनरेगा के 6.40 करोड़ से कराए गए कामों का सवाल है, उनकी अधिकारियों की टीम बनाकर जांच कराने का निर्णय लिया है।’ गौरव दयाल, डीएम