समाजवादी पार्टी के जिला और महानगर अध्यक्षों की आज लखनऊ में बैठक हो रही है। इस मीटिंग पर बरेली में सपा की राजनीति का सारा दारोमदार टिका है। जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके पूर्व राज्यसभा सदस्य वीरपाल सिंह यादव और महानगर अध्यक्ष जफरबेग को नौ विधानसभा सीटों का फीड बैक देने के लिए बुलाया गया है। 24 अक्तूबर को सपा के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व सांसदों की बैठक होगी। इसके बाद संगठनात्मक फेरबदल का निर्णय लिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह के बीच मतभेद सतह पर आने और वीरपाल सिंह यादव के जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद बरेली में सपा संगठन पिछले डेढ़ महीने से निष्क्रिय चल रहा है। शहर विधानसभा छोड़कर, शेष आठ सीटों पर पार्टी चार महीने पहले ही प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। शहर सीट से भी सपा हाईकमान ने शेरअली जाफरी को टिकट दिया था जो चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके हैं। हालांकि पार्टी की दूसरी सूची में भी शहर सीट से शेरअली का नाम घोषित करने से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति है। सपा की प्रचार सामग्री दफ्तर में जमा है। ज्यादातर सपा प्रत्याशी अपना चुनाव प्रचार करने के बजाय घर में टीवी या सोशल मीडिया के जरिए ये पता लगाने में जुटे हैं कि ऊपर क्या चल रहा है। 24 अक्तूबर को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व सांसदों की बैठक लेकर हाल ही में उपजी पार्टी की आंतरिक कलह से चुनाव पर पड़ने वाले असर का फीड बैक लेंगे। इसके बाद संगठन में फेरबदल की अटकलें हैं।
उधर, पांच नवंबर को लखनऊ में होने वाले पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में बरेली से सपा युवजन सभा, लोहिया वाहिनी समेत सपा के फ्रंटल संगठनों के युवा पदाधिकारी बहिष्कार करने की घोषणा कर चुके हैं। इन सबको लेकर स्थानीय नेताओं में भ्रम की स्थिति है। लखनऊ की दोनों मीटिंगों के बाद ही सपा का राजनीतिक भविष्य अपनी दिशा तय करेगा।
हमें और महानगर अध्यक्ष को लखनऊ बुलाया गया है। उसमें संगठन के अलावा 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होगी। हाईकमान से जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा- वीरपाल सिंह यादव