बरेली। आरटीओ दफ्तर अराजकता की गिरफ्त में है। यहां 11 बजे तक अफसरों का पता नहीं होता, पर दलाल सुबह 10 बजे से पहले ही पहुंच जाते हैं। जिस खिड़की पर आम आदमी को झिड़क दिया जाता है, उसी पर दलालों का स्वागत होता है। शुक्रवार को की गई पड़ताल में यह हकीकत सामने आई।
सुबह 10:40 बजे तक दफ्तर में सन्नाटा पसरा रहा। आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह, आरटीओ प्रवर्तन प्रणव झा व एआरटीओ प्रशासन पीके सरोज के कमरे खाली मिले। उनके कक्ष में स्टेनो तक मौजूद नहीं थे। पूछने पर दूसरे कर्मचारी कोई सटीक जवाब नहीं दे सके। कई लिपिक भी लापता मिले। विभिन्न खिड़कियों पर अपने-अपने कार्य के मुताबिक दलाल अंगद की पांव की तरह डटे हुए थे। वे लिपिकों के आने का इंतजार कर रहे थे।
इसी बीच प्रवर्तन शाखा का द्वार खुला और सफाई कर्मचारी ने झाड़ू लगानी शुरू की। यहां कक्ष संख्या 10 बंद मिला, पर पिछला दरवाजा खुला था। पूछने पर एक कर्मचारी ने बताया कि प्रधान सहायक जाहिद मियां छुट्टी पर हैं। उनकी जगह नाजिम काम देख रहे हैं। अभी आ जाएंगे।
पंजीयन शाखा में भी खाली मिलीं कुर्सियां
पंजीयन शाखा के कक्ष संख्या सात व आठ में कुर्सियां खाली मिलीं। कक्ष संख्या नौ में एक कर्मचारी बैठा मिला, जबकि उसके बगल की कुर्सी खाली थी। कर्मचारी से बगल की खाली कुर्सी के बारे में पूछा तो बाहर खड़ा दलाल तपाक से बोल पड़ा कि मैडम कमरा नंबर पांच में हस्ताक्षर करने गई हैं। कुछ देर में वह माजरा समझ गया तो दूसरे अधिकारी के बारे में पूछने पर सफाई देने लगा। और सवाल करने पर वह बाहर चला गया। संवाद
मैं अवकाश पर हूं, लेकिन सुबह 10:40 बजे परिसर में झाड़ू लगना अनुशासन के खिलाफ है। कुछ कर्मचारी छुट्टी जरूर हैं, लेकिन उनकी जगह दूसरों को लगाया गया है। देर से आने वाले कर्मचारियों और अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। - पंकज सिंह, आरटीओ प्रशासन
एआरटीओ पीके सरोज पर प्रवर्तन का भी चार्ज है। वह फील्ड पर थे। प्रवर्तन शाखा के अन्य कर्मचारी समय पर कार्यालय क्यों नहीं पहुंचे? इस संबंध में जवाब तलब किया जाएगा। - प्रणव झा, आरटीओ प्रवर्तन