कमलेश तिवारी हत्याकांड में बरेली से उठाए गए दरगाह पर नात पेश करने वाले कैफी से लखनऊ में एटीएस की पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
अफसरों को कैफी ने सफाई दी कि शुरू में उसने अनजाने में मदद कर दी थी। हालांकि जब उसे सच्चाई पता लगी तो उसने दरगाह में शरण लेने आए हत्यारोपियों को तुरंत दरगाह छोड़ देने के लिए कहा था। इसके बाद उन्हें लाने वाले वकील नवेद सिद्दीकी ने जंक्शन ले जाकर ट्रेन में बैठा दिया।
21 अक्तूबर की रात एटीएस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम प्रेमनगर के शाहबाद मोहल्ला निवासी दरगाह में नात पेश करने वाले सैयद कैफी अली को उठा ले गई थी। तभी से लंबी पूछताछ की जा रही है। बुधवार देर रात लखनऊ लाए गए हत्यारोपियों से गुरुवार को उसका सामना कराकर बंद कमरे में घंटों सवाल जवाब किए गए। यहां सवालों में कैफी फंस गया।
उसने बताया कि हत्यारोपी कुछ दिन दरगाह परिसर में रुकने के इरादे से बरेली आए थे। उसने वकील नवेद के कहने पर अनजाने में हत्यारोपियों की मदद कर दी। उन्हें खाना खिलवाया और नवेद के एक नजदीकी डॉक्टर से इलाज करा दिया। दूसरे जायरीन की तरह इन लोगों से भी उसे आर्थिक मदद का लालच था।
बताया कि करीब चार घंटे बाद जब उसे हकीकत का पता लगी तो उसने दोनों हत्यारों को दरगाह से तुरंत चले जाने को कह दिया। उन्होंने कई तरीके का लालच दिया पर उसने एक न सुनी और दरगाह के पदाधिकारियों व पुलिस से शिकायत करने की चेतावनी दे दी। इसके बाद नवेद दोनों को जंक्शन छोड़ आया।
इस बीच कैफी पर सबसे बड़ा आरोप यह रहा कि उसने हत्यारोपियों के बारे में जानकारी के बाद भी उस वक्त पुलिस को घटनाक्रम के बारे में नहीं बताया। ऐसा होता तो हत्यारों को बरेली में ही पकड़ा जा सकता था। कैफी ने फिर सफाई दी कि घटना के बाद से वह काफी घबरा गया था। उसने अपने परिवार से भी इसका जिक्र नहीं किया था।