बरेली। कैंट क्षेत्र में दो नवंबर को परंपरा के नाम पर लाठी-डंडों से घेरकर कराई गई भैंसों की लड़ाई की जांच चार दिन बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। तीन सदस्यीय जांच समिति के गठन के भी दो दिन हो गए हैं, लेकिन समिति सात किलोमीटर की दूरी तय कर मौके पर नहीं पहुंच पा रही है, जो चश्मदीदों से पूछताछ कर सके। यह हाल तो तब है जब डीएम जांच के आदेश कर चुके हैं और रिपोर्ट बुधवार को सौंपी जानी है।
कैंट क्षेत्र में परंपरा के नाम पर कुछ लोगों ने हाथ में लाठी-डंडों से घेरकर भैंसों की लड़ाई करवाई थी। इसका वीडियो वायरल होने के बाद संस्था पीपुल्स फॉर एनीमल्स (पीएफए) ने संज्ञान लिया और डीएम व पुलिस से शिकायत की। डीएम ने लेखपाल से जानकारी हासिल की और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को जांच के निर्देश दिए। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेघश्याम ने सोमवार को दोपहर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। मंगलवार रात तक जांच समिति कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंची।
जांच समिति में उप मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी सदर डॉ. ओपी वर्मा, उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी मुख्यालय डॉ. मोनिका गुप्ता और क्यारा के पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. राजेश शामिल हैं। डॉ. ओपी वर्मा ने मंगलवार को शाम को तीन बजे के बाद कैंट स्थित पशु अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीएफए रेस्क्यू प्रभारी धीरज पाठक और कैंट के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अखिलेश कुमार से घटनाक्रम की जानकारी की, लेकिन किसी प्रत्यक्षदर्शी से बातचीत नहीं की। न ही उस लेखपाल से मुलाकात की जो प्राथमिक जांच कर डीएम को जानकारी दे चुके हैं।
इन सवालों के जवाब तलाशेगी समिति
- जिन लोगों के हाथ में लाठी डंडे नजर आ रहे हैं, उनके नाम और पते क्या हैं।
- भैंसे लड़ाकर हार-जीत के लिए दांव लगाए जा रहे थे, तब कितने रुपये का लेनदेन हुआ।
- कब से कब तक भैंसे लड़वाए गए। कितने साल से हो रहा था यह आयोजन।
समिति बुधवार को घटनास्थल जाएगी और संबंधित पक्षों के बयान लेकर साक्ष्यों के आधार पर जांच आख्या उपलब्ध कराएगी।
- डॉ. ओपी वर्मा, जांच समिति के सदस्य
अमर उजाला ब्यूरो