बरेली। कोतवाली से जिला अस्पताल और कुतुबखाना तक का जाम नासूर बनता जा रहा है। कोतवाली से पड़ोस से ही सड़क घेरकर अवैध बाजार लगता है। आधे किलोमीटर में सौ से अधिक ठेले खड़े होते हैं। दो मिनट का सफर अतिक्रमण की वजह से पहाड़ जैसा लगता है। जिला अस्पताल जाने वाली एंबुलेंस भी इस जाम में फंसती हैं। रोगी कराहते रहते हैं। वर्षों से लग रहे इस बाजार पर पुलिस से लेकर नगर निगम के अधिकारी तक सभी मेहरबान हैं।
कुतुबखाना बाजार शहर का सबसे व्यस्त इलाका है। मंडलभर के ग्राहक यहां खरीदारी करने के लिए आते हैं। कोतवाली से कुतुबखाना तक दुकानों के बाहर सामान रखकर व फड़ लगाकर अवैध बाजार सजाया जा रहा है। यहीं पर जिला अस्पताल भी है। दिनभर जांच में फंसीं एंबुलेंस हूटर बजाती रहती हैं। कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। दुकानदार कई बार नगर निगम के अधिकारियों से अतिक्रमण को लेकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
सूत्र बताते है कि इस अवैध बाजार में लंबा खेल होता है। फुटपाथ पर निशान लगाकर उसे ठेले वालों को बेच दिया गया है। रोज यहां से वसूली होती है। इससे लाखों रुपये का टैक्स देने वाले व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापारियों ने की अवैध बाजार हटाने की मांग
स्थानीय व्यापारी भी अब अतिक्रमण के खिलाफ मुखर होने लगे हैं। मंगलवार को भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष अनिल अग्रवाल कई व्यापारियों के साथ नगर आयुक्त संजीव मौर्य ने मिलने पहुंचे। उन्होंने अतिक्रमण की वजह से व्यापारियों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया। पटेल चौक से चौकी चौराहे के बीच फुटपाथ पर कपड़ों की दुकानें तो सर्किट हाउस व जजेज काॅलोनी के पीछे कंबल का अस्थायी बाजार है। श्यामगंज पुल के सामने जूते-चप्पलों का अस्थायी बाजार नियमित रूप से लग रहा है। इनमें अधिकतर व्यापारी बाहर से माल लाकर कर दिए बिना खुलेआम व्यापार कर रहे हैं। दूसरी ओर, शहर के स्थायी दुकानदार करोड़ों रुपये की पूंजी लगाकर, बैंकों से लोन लेकर, दुकानें खरीदकर या किराये पर लेकर व्यापार कर रहे हैं। वह ईमानदारी से कर भी दे रहे हैं, लेकिन इन अवैध बाजारों के कारण उनको नुकसान झेलना पड़ रहा है। नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर अवैध बाजारों को हटाने की मांग की गई है। इस दौरान महानगर अध्यक्ष कुमार गौरव शर्मा, जिला महामंत्री जसपाल सिंह बग्गा, बल्ले ठाकुर, रजत शर्मा, अनमोल तिवारी, प्रतीक मिश्रा, राघव खंडेलवाल, मनजीत सिंह आदि व्यापारी मौजूद रहे।