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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: टैटू बनवाने का शौक... बना सकता है हेपेटाइटिस का शिकार; ऐसे करें बचाव

Fri, 28 Jul 2023 06:37 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि टैटू दिखने में जितना ट्रेंडी और अच्छा लगता है, उतना ही हानिकारक हो सकता है। एक अध्ययन के अनुसार हेपेटाइटिस से पीड़ित 55 प्रतिशत लोगों के शरीर पर टैटू गुदा हुआ मिला है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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टैटू बनवाने का क्रेज आपको हेपेटाइटिस का शिकार बना सकता है। बरेली के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि टैटू दिखने में जितना ट्रेंडी और अच्छा लगता है, उतना ही हानिकारक हो सकता है। लोगों को लगता है कि टैटू बनवाने से त्वचा संबंधित परेशानियां ही होती होंगी, लेकिन इसमें प्रयोग होने वाली सुई और टॉक्सिक इंक्स के कारण हेपेटाइटिस बी या सी जैसी बीमारी भी हो सकती है। टैटू गुदवाने वाली निडिल को स्टरलाइज भी नहीं किया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार हेपेटाइटिस से पीड़ित 55 प्रतिशत लोगों के शरीर पर टैटू गुदा हुआ मिला है।

इसलिए होती है खून देने में समस्या

अक्सर देखा गया है कि टैटू बनवाने वाले लोगों के रक्तदान में समस्या होती है। इसका कारण यही है कि उनके हेपेटाइटिस बी, सी व एचआईवी से संक्रमित होने की आशंका होती है। इसलिए रक्तदान से पहले टैटू बनवाने वाले लोगों को अलग से जांच करानी पड़ती है।

जानिए, क्या है हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस एक लिवर संबंधित बीमारी है। यह वायरल इंफेक्शन के कारण होता है। इसमें लिवर में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस ए,बी, सी, डी और ई कुल पांच प्रकार की होती है।

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ऐसे करें हेपेटाइटिस से बचाव

- साफ व स्टरलाइज्ड सिरिंज का प्रयोग करें।
- अपने रेजर, ब्रश व सुई को शेयर न करें।
- टैटू बनवाने और कान छेदवाने में सुरक्षित उपकरणों का उपयोग करें।
- छोटी उम्र में ही हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।
- डॉक्टर की राय से एंटीबॉडीज का इंजेक्शन ले सकते हैं।
- साफ पानी और भोजन का सेवन करें।
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हेपेटाइटिस के लक्षण

अधिक थकान, भूख न लगना या कम लगना, अचानक वजन कम होना, जॉन्डिस या पीलिया, पेट दर्द व सूजन।

हेपेटाइटिस होने के कारण

हेपेटाइटिस ए खराब भोजन और दूषित पानी के सेवन से होता है। हेपेटाइटिस बी इंफेक्टेड ब्लड और दूसरे फ्लूइड के संपर्क में आने से होता है। हेपेटाइटिस सी संक्रमित इंजेक्शन के इस्तेमाल से हो सकता है। जो लोग पहले से एचबीवी वायरस के संक्रमित होते हैं, वह हेपेटाइटिस डी की चपेट में आ जाते हैं। विषाक्त पानी और भोजन के कारण हेपेटाइटिस ई हो सकता है।

70 प्रतिशत महिलाएं होती हैं शिकार

जिले में हेपेटाइटिस के 800 मरीज हैं। हर माह 40 नए मरीज सामने आते हैं। जिला अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस की चपेट में 70 फीसदी महिलाएं आती है। इसका इलाज छह माह तक चलता है और नियमित दवा के सेवन से 80 फीसदी मरीज स्वस्थ हो जाते हैं। जिला अस्पताल में इसकी निशुल्क जांच व दवा दी जाती है।
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