पीलीभीत। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. संध्यारानी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम शनिवार को दिन में 11.30 बजे कॉलेज पहुंची। दोपहर 12 बजे क्लास रूम को बंद करके जांच शुरू की गई। क्लास रूम में पीड़ित छात्रा के अलावा 20-25 छात्राएं और थीं। जांच अधिकारी ने जेल में बंद असिस्टेंट प्रोफेसर कामरान आलम खान के बारे में जानकारी ली। साथ ही प्राचार्य और कॉलेज के शिक्षकों के संबंध में भी जानकारी मांगी। इसमें प्राचार्य की भूमिका पर सवाल उठे।
जांच टीम के जाने के बाद तीन छात्राओं ने कॉलेज परिसर में ही डॉ. कामरान आलम खान की हरकतों की कलई खोली लेकिन एक छात्रा ऐसी भी थी, जिसका कहना है सेक्स रैकेट चलाए जाने का आरोप गलत है। एक मौका तो ऐसा आया जब छात्राएं दो पक्षों में बंटी हुई नजर आईं। असिस्टेंट प्रोफेसर पर जो आरोप लगे थे उन पर कुछ छात्राएं प्रोफेसर के बचाव में बोलती नजर आईं जबकि तीन छात्राओं ने कहा- जो होता था वही उन्होंने जांच टीम को बताया है। करीब चार घंटे तक जांच पड़ताल के बाद टीम शाम चार बजे वापस हो गई। वापस जाने से पहले मीडिया के सवालों पर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. संध्यारानी ने कहा कि वह अपनी जांच आख्या उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक को प्रस्तुत करेंगी। जांच का निष्कर्ष मीडिया को नहीं बताएंगी। लेकिन कॉलेज में शैक्षिक माहौल को बनाए रखने की उनकी प्राथमिकता रहेगी।
दो और छात्रा ने खोली असिस्टेंट प्रोफेसर की करतूत
दुष्कर्म पीड़ित छात्रा के साथ दो छात्राओं ने शुक्रवार को जांच टीम से मिलने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर की करतूतों की कलई कुछ मीडिया प्रतिनिधियों के सामने खोली है लेकिन दुष्कर्म किए जाने से इन दोनों ने इनकार किया है। इनका कहना है कि जब-जब असिस्टेंट प्रोफेसर ने उन पर डोरे डाले या अश्लील बातें करके उसको फंसाने का प्रयास किया उन्होंने विरोध किया और अपने माता-पिता को भी बताया। इसलिए प्रोफेसर कुछ नहीं कर सका।
जब मिलता था मौका तब करता था अश्लील बातें
एक छात्रा ने बताया कि लाइब्रेरी से लेकर क्लास रूम तक असिस्टेंट प्रोफेसर को जब मौका मिल जाता था वह अश्लील बातें करता था। कोई छात्रा कभी उसके खिलाफ बोलने का साहस इसलिए नहीं करती थी कि कॉलेज पर उसका दबदबा था। प्राचार्य भी कुछ नहीं कहते थे। कॉलेज में कोई महिला प्राध्यापक नहीं थी। ऐसे में वे अपनी बात किससे कहतीं। एक बार एक छात्रा कॉलेज की शिकायत पेटिका में लिख कर डाला था कि कॉलेज में महिला प्राध्यापक होनी चाहिए लेकिन इस शिकायत का क्या हुआ किसी को कुछ नहीं पता।
यह है मामला
राजकीय महिला महाविद्यालय में गणित के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कामरान आलम खान के खिलाफ 21 नवंबर को बीएससी की छात्रा ने दुष्कर्म और रेक्स रैकेट के संचालन का आरोप लगाते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। छात्रा का मेडिकल हुआ। अदालत में छात्रा ने बयान कलमबंद कराए। असिस्टेंट प्रोफेसर की 26 नवंबर को गिरफ्तारी की गई। प्रोफेसर जेल में है। पुलिस की अब तक की विवेचना में उन छात्राओं तक के बयान नहीं ले सकी है जो असिस्टेंट प्रोफेसर की करतूतों की कलई खोल सकती थीं।
छात्रा ने प्राचार्य की भूमिका पर फिर उठाए सवाल
दुष्कर्म पीड़िता लगातार यह बात कहती रही है कि विवेचनाधिकारी और कॉलेज के प्राचार्य भूमिका सही नहीं है। एसपी ने इस पर विवेचना अधिकारी तो बदल दिया है पर प्राचार्य पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुष्कर्म पीड़िता ने तीन सदस्यीय जांच टीम के सामने भी प्राचार्य की भूमिका को सवालों के दायरे में लिया और आरोप भी लगाए। यह सुझाव दिया कि अगर यह प्राचार्य पद पर रहते हैं जो जांच निष्पक्षता से नहीं हो सकेगी।
पहचान उजागर होने का डर है, इसलिए नहीं बताया पुलिस को
जांच टीम से मिलने के बाद दो छात्राओं ने कहा कि उनके पास बताने के लिए तो बहुत कुछ है लेकिन बदनाम होने का डर रहता है। उन्होंने जांच टीम को हकीकत बता दी है लेकिन पुलिस से यह सब शेयर नहीं कहना चाहती है क्योंकि पुलिस जांच पड़ताल के नाम पर बार बार थाने बुलाती है। इससे दिक्कत आती है और पहचान उजागर होने का भी डर रहता है।
ताकि कोई छात्रा रिकॉर्डिंग न करने पाए
जांच टीम ने किसी भी छात्रा को अपना मोबाइल लेकर जांच के कक्ष में नहीं जाने दिया। जांच टीम ने छात्राओं के बैग भी रखवा लिए थे। जब छात्राएं बयान देकर वापस आईं तभी उन्हें उनके मोबाइल वापस मिले। छात्राओं के दो खेमे जांच कक्ष में ही बन गए थे।
अधिकतर छात्राओं की हमदर्दी तो पीड़ित छात्रा के साथ थी लेकिन सेक्स रैकेट संचालित किए जाने के सवाल पर वह सहमत नहीं थीं। जबकि पीड़िता का कहना था कि अगर पुलिस और प्रशासन अपनी जांच से इस बात का भरोसा दिलाए कि न्याय होगा और पीड़िताओं को भविष्य में कोई बदनाम नहीं करेगा तो पूरा राज खुल जाएगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर के पास था लाइब्रेरी का चार्ज
असिस्टेंट प्रोफेसर के पास लाइब्रेरी का चार्ज था। जहां पर वह छात्राओं से अश्लील बातें करता था। इसके अलावा वह कालेज परिसर में स्थित अपने कक्ष में भी अश्लील किताबें रखता था और छात्राओं को बालिग बताकर उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करता था।
असिस्टेंट प्रोफेसर के क्लास रूम क्यों नहीं था सीसीटीवी कैमरा
एक छात्रा ने यह भी बताया कि असिस्टेंट प्रोफेसर के क्लास रूम और कंप्यूटर कक्ष में सीसीटीवी कैमरे और वॉयस रिकॉर्डर नहीं लगाए गए थे जबकि पूरे कॉलेज के प्रत्येक कक्ष में कैमरे लगे थे। इसलिए क्लास रूप मेे लेकर कंप्यूटर कक्ष तक जहां प्रोफेसर को मौका मिलता था वह गंदी बातें छात्राओं के संग करता था। एक छात्रा ने कहा कि पूरे कॉलेज के प्रत्येक क्लास रूम में सीसीटीवी कैमरे थे। पर कामरान आलम खान का कक्ष छोड़ दिया गया था? ऐसा क्यों था? जब इस पर विचार करेंगे तो हकीकत की परतें खुलती चली जाएंगी। वहीं जब प्राचार्य से इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि गणित का क्लास रूम 2019 में बना था। इसमें फर्नीचर और सीसीटीवी कैमरे नहीं थे जिसके लिए उन्होंने उच्चाधिकारियों तक को पत्र लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ। फर्नीचर तो दूसरे क्लास रूम से दिया था लेकिन सीसीटीवी कैमरों के लिए वह पत्र लिखते रहे। कैमरे नहीं लगे।