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राशन की 300 दुकानों को लेकर हो रहा है खेल

Tue, 13 Dec 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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जिले की 300 राशन की दुकानों को निलंबित कराने और इनकी बहाली का खेल कोटेदार सपा नेताओं के बीच  करा रहे हैें। इसी खेल में मीरगंज की एसडीएम को निलंबित होना पड़ा। हालांकि अभी कुछ और अफसर बी सपा नेताओं की राजनीति में नप सकते हैं।
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जिले के ग्रामीण इलाकों में राशन की 1326 दुकानें हैं। इनमें से करीब 300 दुकानों को लेकर जिले की सभी छह तहसीलों में सपा नेता राजनीति कर रहे हैं। इन गांवों की दुकानों को लेकर सपा नेताओं का एक गुट राशन की दुकान निलंबित कराके दूसरे राशन डीलर से लंबे अर्से तक संबद्ध कराना चाहते हैं। जबकि दूसरा गुट निलंबन खत्म कराने पर अड़ा रहता है। इसके पीछे नेताओं का मकसद है कि अपने चहेते राशन डीलर के यहां दूसरे डीलर के कार्ड संबद्ध करा दिए जाएं, जिससे कि उसे दो गुना राशन ब्लैक करने का फायदा मिल जाए। जो डीलर राजनीतिक दृष्टि से विरोधी दिखते हैं उनके कोटे को निलंबित कराते हैं।
राज नेताओं की गुटबंदी इतनी ही नहीं, ये लोग डीएसओ, डिप्टी कमिश्नर (आपूर्ति) डीएम, कमिश्नर पर कराने का दबाव बनाते हैं । इसी रणनीति के तहत लंबे अर्से तक कोटा दूसरे गांव के डीलर से संबद्ध करवाजबकि दूसरा गुट इस कोशिश में रहता है कि  निलंबित की गई दुकान जल्दी से जल्दी बहाल हो जाए। 
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इस तरह होता है ब्लैक का खेल
राशन डीलर महीने के आखिर में गांव के राशन की चीनी, मिट्टी का तेल और गेहूं का उठान करते हैं। लेकिन ज्यादातर डीलर अपने यहां का राशन और तेल मुख्यालय पर ही छोड़ देते हैं। जिसकी एवज में वह कालाबाजारी का मुनाफा ले लेते हैं। इस तेल को पंपों पर डीजल में मिलावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि गेहूं फ्लोर मिलों को बेच दिया जाता है। यह सिस्टम अकेले बरेली में ही नहीं बल्कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में चल रहा है, जिसमें निचले स्तर से लेकर बड़े बड़े अफसर और सत्ताधारी नेता लिप्त रहते हैं।
दो महीने पहले डीएम ने इस कालाबाजारी को सुधारने की कोशिश की थी। उन्होंने निर्देश दिए थे कि कोई भी राशन की दुकान तीन महीने से ज्यादा समय तक निलंबित नहीं होगी। समय सीमा में अफसरों को इस तरह के मामले निपटाने होंगे। साथ में यह भी आदेश किए कि जिन कोटेदारों को निलंबित दुकानों का राशन बांटने के आदेश किए हैं वह पहले तारीख की मुनादी कराएंगे और उसी गांव में राशन लाकर बांटेंगे। लेकिन इस आदेश का भी ठीक से कोटेदार पालन नहीं कर रहे हैं।
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