ईद मिलादुन्नबी के जश्न में सोमवार को पूरा शहर डूबा रहा। हर गली मोहल्ले और घरों में रौनक छाई रही। जगह-जगह नात और कव्वाली की गूंज थी, जिसमें नबी की शान में कलाम पढ़े जा रहे थे। लोग नए-नए कपड़े पहनकर निकले और एक दूसरे को मुबारकबाद पेश करते नजर आए। इस उत्साह भरे माहौल के बीच शाम को शानो शौकत के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया।
मेरे सरकार आए ....जैसी कव्वाली और नाते पाक- बारहवीं का चांद आया, झंडे लहराओ, खुशियां मनाओ, झूमो बारहवीं का चांद आया....जैसे कलाम के अलावा सरकार की आमद मरहबा, मक्की की आमद मरहबा और पत्ती-पत्ती फूल-फूल यार रसूल या रसूल के नारों की गूंज जुलूस में रही। जो पैगंबर की आमद का एहसास करा रही थी। इन कलाम और नारों के बीच जुलूस में चलती अंजुमन विभिन्न इस्लामी वेष भूषा में निकली तो शहर की सड़कें रुहानियत से भर गई।
जुलूस में खास तौर से छुक-छुक...करती चल रही रजा एक्सप्रेस मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। वहीं दिल में देश भक्ति और सुरक्षा का जजबा लिए सेना की वर्दी में मुस्लिम युवा जुलूस में जोश भर रहे थे। इसके अलावा खाने काबा और नबूवी मस्जिद के बीच लाल किले का माडल भी शामिल दिखा, जबकि सजी धजी बाइक के बीच बच्चों की मिनी खिलौना कार चलाते बच्चे भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे थे। खास बात थी हर अंजुमन संग इस्लामी झंडे के साथ एक तिरंगा भी जुलूस की शान बढ़ा रहा था।
जुलूस की शुरुआत शाम को कोहाड़ापीर से हुई। इससे पहले मुफ्ती अय्यूब ने अपनी तकरीर में नबी-ए-करीम की शान तकरीर की। दस्तारबंदी के बाद आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने सय्यद सरकार हुसैन को परचम देकर जुलूस को रवाना किया। जुलूस सुब्हानी मियां के ही कयादत में निकाला गया। उनके साथ साहबजादा व सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी भी चल रहे थे।
यह जुलूस कुतुबखाना, नावल्टी से पहलवान साहब की दरगाह होकर इस्लामियां मार्ग से जिला परिषद मार्ग और बिहारीपुर होता हुआ दरगाह आला हजरत पहुंच कर मुकम्मल हुआ। मंच संचालन हाजी कासिम कश्मीरी ने किया। आभार अध्यक्ष जमीर उद्दीन ने व्यक्त किया। जुलूस में टीटीएस का भी सहयोग रहा। इसमें अजमल नूरी, शाहिद खां नूरी, परवेज नूरी, औरंगजेब खां, तारिक सईद, शारिक बरकाती, शान सुब्हानी शामिल रहे। इससे पहले किला क्षेत्र की अंजुमनें जुलूस की शक्ल में अहसन मियां की कयादत में कोहाड़ापीर पहुंचीं।