बरेली। सोमवार शाम तक पार्थिव शरीर के बरेली आवास पर न पहुंचने की वजह से शहीद जवान सौरभ का अंतिम संस्कार अब मंगलवार सुबह सात बजे संजयनगर श्मशान भूमि में होगा। पिता के मुताबिक सैन्य हेडक्वॉर्टर से उन्हें सूचना दी गई है कि सोरभ का पार्थिव शरीर सोमवार रात नौ बजे श्रीनगर से फ्लाइट के जरिये दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेगा। वहां से सेना की एंबुलेंस सड़क मार्ग से मंगलवार सुबह पांच बजे पार्थिव शरीर लेकर बरेली आवास पहुंचेगी। शहीद लांस नायक सौरभ के पार्थिव शरीर के साथ बरेली के ही रहने वाले सूबेदार राजीव और तीन जवान लेकर आएंगे।
सांसद संतोष पार्थिव शरीर परिजन
तक पहुंचाने का करते रहे प्रयास
बरेली के लाल के पाक सीमा पर आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद होने की सूचना पर सोमवार को भाजपा नेता गुलशन आनंद परिजन को ढांढस बंधाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि पार्टी के विशेष कार्य से सांसद संतोष गंगवार हैदराबाद गए हुए हैं। उन्हें सूचना मिलने के बाद पार्थिव शरीर को बरेली पहुंचाने के लिए वह लगातार सैन्य अधिकारियों के संपर्क में हैं। शहीद की अंत्येष्टि के दौरान भाजपा के पदाधिकारी श्मशान भूमि में मौजूद रहेंगे।
इंटर पास करके सेना में भर्ती हुए थे सौरभ
पिता राजुकमार के मुताबिक सौरभ ने वर्ष 2013 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पीसी आजाद इंटर कॉलेज से उत्तीर्ण की थी। सौरभ पढ़ाई के साथ ही सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे। वह बंगाल इंजीनियरिंग रुड़की और फतेहगंज में सेना भर्ती में शामिल हुए। दोनों ही स्थानों पर उनका चयन हो गया था। पिता ने कहा कि वह खुद चूंकि सेना की 23 राजपूत रेजिमेंट में भर्ती हुए थे, इसलिए बेटे को भी राजपूत रेजीमेंट में ही भर्ती कराया था।
पढ़ाई में तेज और सीधे स्वभाव के थे भाई सौरभ
सौरभ के छोटे भाई राहुल कुमार ने बताया कि भैया पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहते थे। स्वभाव के बहुत सीधे थे। उनकी कभी किसी से कहासुनी तक नहीं हुई। सेना में भर्ती होने के बाद जब भी फोन पर बात होती तो वह कहते थे कि माता-पिता का ध्यान रखना। उन्हें कोई तकलीफ हो तो तुरंत बताना। अभी जब आखिरी बार बात हुई थी तो पाक सीमा पर तैनाती के बावजूद उन्हें माता-पिता की ही फिक्र थी। दो घंटे बाद ही उनके वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिली।
बहनों के दुलारे थे सौरभ, रो-रोकर बुरा हाल
सौरभ की दोनों बड़ी बहन ज्योति और अर्चना का विवाह हो चुका है। भाई के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिलने के बाद से ही वे बदहवास हैं। वे ससुराल से मायके आ गई हैं और खुद गमगीन होने के बावजूद माता को ढांढस बंधा रही हैं। पिता के मुताबिक बहनें हमेशा भाई की फिक्र करतीं थीं। सौरभ जब भी बहनों को फोन करते तो बहनें उनसे अपना ध्यान रखने को कहती थीं। सौरभ की मां कुसुम की तबीयत ठीक नहीं है।
मेरठ, हापुड़, हरियाणा से पहुंचे रिश्तेदार
सौरभ के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिलने पर उनके दूर दराज से रिश्तेदार देर रात तक बरेली पहुंचते रहे। परिजन के मुताबिक वे मूलरूप से हापुड़ के रहने वाले हैं पर साल 2007 में वह बरेली में बस गए। पिता हवलदार राजकुमार यूबी एरिया हेडक्वॉर्टर बरेली से ही सेवानिवृत्त हुए थे। यहां रहने के दौरान ही उन्होंने सनसिटी विस्तार में अपना घर बना लिया। मेरठ, हापुड़, हरियाणा से उनके रिश्तेदार बरेली पहुंच गए हैं।