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जहर बन गया खाना, दो बहनों की मौत एक गंभीर

Sun, 20 Dec 2015 02:14 AM IST
बरेली
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बरेली। गांव दोंद आलमपुर की गौंटिया में शुक्रवार रात उल्टी और दस्त आने के बाद अचानक दो मासूम बहनों की कुछ ही घंटों में मौत हो गई, जबकि तीसरी बहन को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक साथ दो बच्चियों की मौत से पूरे गांव में दहशत और मातम का माहौल है। पोस्टमार्टम और खाने की जांच न होने के चलते मौत का कारण भी नहीं पता चल सका। घरवालों का कहना है कि बासी मछली खाई थी जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि फूड प्वाइजनिंग भी हो सकती है।
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दोंद आलमपुर की गौंटिया की आबादी 600 के आसपास है। शुक्रवार को केहर सिंह राजपूत के छह बच्चों में से तीन हेमलता (7), मधु (5) और धर्मेश्वरी (8) को तेज बुखार चढ़ गया था। रात में तीन बजे अचानक हेमलता को उल्टी आईं। परिवार वाले कुछ समझ पाते तब तक उसकी मौत हो गई। इतने में सुबह पांच बजे मधु को भी उल्टियां शुरू हो गईं। उसे शहर के अस्पताल ला रहे थे कि मीरगंज हाईवे पर उसने भी दम तोड़ दिया। घर पहुंचते- पहुंचते तीसरी बच्ची धर्मेश्वरी की हालत भी बिगड़ने लगी। उसे पहले गांव के ही डॉक्टर को दिखाया जिसने उसे बरेली के सिटी स्टेशन स्थित निजी अस्पताल भेज दिया। यहां शाम पांच बजे तक भर्ती बच्ची की हालत में कोई सुधार न होने पर परिवार वाले उसे सिविल लाइंस स्थित अस्पताल में ले आए। उधर, गांव में दोनों बच्चियों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
- न पोस्टमार्टम कराया और न खाने की जांच
केहर सिंह कश्तकारी का काम करते हैं और घर की हालत काफी दयनीय है। बताते हैं कि रात में सभी ने दाल रोटी खाई थी। हालांकि केहर सिंह ने बताया कि गुरुवार की रात को स्थानीय बाजार से खरीदकर लाए मछली बनाकर सबने खाई थी। रात में कुछ मछली बची तो उसे सुबह भी खाया गया। लेकिन तीन बेटियों की हालत बिगड़ गई। इस पर भी किसी ने न तो पुलिस को सूचना दी न डॉक्टरों को। दो बच्चियों की पोस्टमार्टम जांच और खाने के नमूने भी नहीं लिए गए।
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- गांव के झोलाछाप भी कम खतरनाक नहीं
हेमलता की मौत के बाद जब मधु को उल्टियां आई तो परिवार के लोग हल्दी गांव के एक डॉक्टर के पास ले गए। जहां इलाज से पहले ही मधु की सांसे थम गईं। धर्मेश्वरी को गांव के डॉक्टरों ने बरेली के आलिया अस्पताल भेज दिया। इस अस्पताल में डॉक्टर मरीज को देखकर चले गए फिर वार्ड ब्वाय व ईएमओ ही बच्ची का इलाज करते रहे। जनरल वार्ड में बैठने तक को जगह नहीं थी। परिवार के लोग किसी तरह वहां से उसे दूसरे अस्पताल में लाए।
- वर्जन--
फूड प्वाइजनिंग से मिनटाें में हो सकती है मौत
यह सुनने में भले ही खतरनाक लगे लेकिन डॉक्टर यही बता रहे हैं। फिजीशियन डॉ. अजय मोहन अग्रवाल ने बताया कि अगर रोगी की प्रतिरोधक क्षमता अगर कम होगी तो कोई भी ऐसा खाद्य पदार्थ जो खराब होगा उसके बैक्टीरिया शरीर में टॉक्सिन बनाते हैं। इससे कुछ ही मिनटों में खाना जहर बन जाता है और उल्टी व दस्त के साथ मौत भी हो जाती है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. डीपी शर्मा कहते हैं कि फूड प्वाइजनिंग इतना भी खतरनाक होता है कि दो से तीन उल्टियों में किसी की जान जा सकती है। यह मरीज की क्षमता पर भी निर्भर है। लेकिन मरने वाले का पोस्टमार्टम व खाने की जांच होनी चाहिए। तभी स्थिति साफ होती।
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