बरेली। किसान कल्याण मेला लगाने और भूमि सुधार के लिए शासन की ओर से जारी की गई रकम को जिम्मेदार हजम कर गए। एक ने जांच में भी अड़ंगा लगाया तो दूसरे ने आदेश के बावजूद जिम्मेदारों से वूसली नहीं की। दोनों अफसर टालमटोल करते रहे। अब दोनों पर कार्रवाई का शिकंजा कस गया है।
वर्ष 2021-22 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर आयोजित किसान कल्याण मेले में 21.56 लाख रुपये खर्च किए गए थे। बाद में हुई जांच में पता चला कि तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने 14,500 रुपये अपने खाते में लिए थे। बाद में वह निलंबित हुए। इसी तरह दो अन्य अधिकारियों और 49 कर्मचारियों ने भी धनराशि का गबन किया। दो बार हुई जांच में 5.57 लाख रुपये गबन की पुष्टि हुई।
23 जून 2024 को तत्कालीन सीडीओ ने डीडी अभिनंदन सिंह को इस रकम की रिकवरी का आदेश दिया था, पर वह शासन से मार्गदर्शन मांगते रहे और मामले को टालते रहे। अमर उजाला में आठ फरवरी को इस संबंध में खबर भी प्रकाशित हुई थी। गबन की धनराशि रिकवरी न करने के आरोप में अब डीडी को निलंबित कर दिया गया है।
वहीं, भूमि संरक्षण विभाग की वाटरशेड विकास योजना के तहत 22 करोड़ रुपये से 104 गांवों में मेड़बंदी, सिंचाई और समतलीकरण कराया गया था। इसमें गड़बड़ी की शिकायत पर संयुक्त विकास आयुक्त प्रदीप कुमार ने इसकी टीएसी जांच कराई थी। तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी संजय सिंह ने छह बार पत्राचार के बावजूद जांच के लिए दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं कराए। इस पर उनका तबादला बांदा कर दिया गया था।
कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने मामले की एसआईटी जांच कराने के लिए शासन को पत्र लिखा था। छह और सात अगस्त को लखनऊ से आई तीन सदस्यीय विभागीय टीम ने मामले की जांच की तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। इसलिए शासन ने बांदा में तैनात संजय सिंह को निलंबित कर दिया है। ब्यूरो
गबन की धनराशि की रिकवरी नहीं कराने के आरोप में शासन ने उप निदेशक अभिनंदन सिंह और पूर्व में यहां तैनात रहे भूमि सुधार अधिकारी संजय सिंह को निलंबित कर दिया है। - डीवी सिंह, संयुक्त निदेशक कृषि, बरेली।