खेती को तीन हिस्सों में बांटें
मोदी ने कहा कि अब वक्त बदलने के साथ खेती को तीन हिस्सों में बांट देना चाहिए। एक तिहाई हिस्से पर परंपरागत खेती करें, एक तिहाई हिस्सा जो खेतों की सीमा होती है वहां बाढ़ लगाने की बजाए पेड़ लगाएं। 15 साल में वही पेड़ बेटी के ब्याह के लायक पैसे दे देगा। टिंबर की जरूरत पर हम आयात करते हैं। उसे दूसरे देशों से लाना पड़ता है। इससे किसान की आय भी बढ़ेगी और देश लकड़ी के लिए आत्मनिर्भर होगा। बाकी बचे एक तिहाई हिस्से पर पशुपालन, मधमक्खी पालन और जहां तक संभव हो वहां पर मछली पालन किसान कर सकते हैं। शहद की डिमांड बहुत है। दवाइयों में इस्तेमाल किया जा रहा है। जब हमारी सरकार नहीं थी तो 1375 लाख टन दूध उत्पादन था लेकिन अब 1465 लाख टन उत्पादन हो गया है।
प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना
मोदी ने प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जितनी भी बीमा योजनाएं थीं वे प्रीमियम के रूप में 14 से 15 फीसदी जमा कराती थीं लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान बीमा खरीफ के लिए सिर्फ दो और रबी की फसलों के लिए डेढ़ फीसदी प्रीमियम पर बीमा होगा। यही नहीं अब एक हेक्टेयर के बजाए दो हेक्टेयर पर मुआवजा मिलेगा। पहले खलिहान में बारिश से फसल बर्बाद होने पर कोई भी पैसा नहीं मिलता था लेकिन अब फसल कटने के 14 दिन तक कोई आपदा आएगी तो बीमे की राशि किसान को मिलेगी। उन्होंने आह्वान किया कि सभी किसान बीमा जरूर कराएं।
प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना
प्रधानमंत्री ने कहा कि जितनी चिंता जमीन की हो उससे ज्यादा जल की भी होनी चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की सरकार ने बूंद बूंद योजना शुरू कर किसानों के घरों तक खुशहाली पहुंचाई है। ऐसा सभी राज्य कर सकते हैं। मनरेगा में हजारों करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन काम कुछ नहीं दिखता। मनरेगा के पैसों से पानी बचाने का काम किया जा सकता है। तालाब खुदें, नहरें ठीक हों। युवाओं से आह्वान किया कि अगर बारिश का पानी बहता दिख रहा है तो वहां रेत के बोरे डाल दें जिससे पानी रुककर जमीन में चला जाए। इससे एक गांव के लिए कम से कम एक साल का पानी बच जाएगा।
ई-प्लेटफार्म का तोहफा
मोदी ने अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल को ई प्लेटफार्म योजना को लांच करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसान अब मोबाइल पर देशभर के बाजार देख सकेगा कि कहां क्या रेट है। फिर वह जिस बाजार में चाहेगा वह बेच सकेगा।
सॉयल हेल्थ कार्ड
मोदी ने कहा कि अपने फायदे के लिए हमने धरती मां पर अत्याचार किए। उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग किया। धरती मां तो कुछ नहीं बोलीं, उनका दर्द हमें दिखाई नहीं दिया लेकिन अब वह बीमार होती जा रही हैं। अन्न के भंडार कम होने लगे हैं। हम किसी बच्चे के बीमार होने पर सलाह देते हैं कि ज्यादा दवाईयां मत खाओ। फिर धरती में इतनी दवाएं क्यों डालते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किया गया है। हर किसान अपने खेती का कार्ड रखे। मिट्टी की जांच कराए और जो जरूरत है उसका प्रयोग करे।
नीम कोटेड यूरिया
मोदी ने नीम कोटेड यूरिया की विशेषताएं बताते हुए कहा कि पहले यूरिया को लेकर मारामारी होती थी। राज्य सरकारें चिट्ठियां लिखती थीं। यह पहला मौका है कि यूरिया के लिए मारामारी नहीं हुई। किसानों को कतार नहीं लगानी पड़ी। हमने इसके लिए यूरिया को नीम कोटेड कर दिया। इससे दो फायदे हुए एक तो जो यूरिया केमिकल फैक्ट्रियों में चला जाता था और दुरुपयोग होता था वह रुका और दूसरे अंधाधुंध प्रयोग की भी जरूरत नहीं। अगर पुराना यूरिया दस किलो डालते हैं तो नीम कोटेड सात किलो ही पर्याप्त होगा। नीम के बीज से यह तैयार होता है तो गांवों की महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।