सेंथल। सैयद चिराग अली शाह का उर्स मेला रौनक फैला रहा है। मेले में लगे झूले और सर्कस बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं। सूफी संत सैयद चिराग अली शाह के दरबार में हजारों लोग पहुंच रहे हैं।
बताया जाता है कि एक नर्तकी की कोई संतान नहीं थी। वह सैयद चिराग के दरबार में आई और उन्हें अपनी अभिलाषा बताई। सैयद चिराग अली शाह के आशीर्वाद से नर्तकी को पुत्र की प्राप्ति हुई। तब से ही लोगों की आस्था सैयद चिराग के मजार से जुड़ी हुई है। यह उर्स मेला वर्ष 1860 से सैयद चिराग अली शाह के मजार पर लगता आ रहा है। एक माह तक चलने वाला उर्स में इन दिनों रौनक छाई हुई है। सज्जादा नशीन हाजी इलियास ने बताया कि 17 दिसंबर रविवार को मजार पर चादरपोशी की जाएगी। पांच जनवरी को कुल होगा। इसके बाद उर्स मेला समाप्त हो जाएगा।