बरेली। संक्रामक रोगों के खिलाफ लड़ाई में जिला लड़खड़ा रहा है। समय फॉगिंग और साफ-सफाई नहीं हो पा रही। इसका खुलासा शासन की ओर से 22 दिन की समीक्षा के बाद जारी रैंक से हुआ है। इसमें बरेली 60वें पायदान पर है। पिछड़ने की वजह पंचायती राज, ग्राम्य विकास, कृषि व पशुपालन विभागों के कामों की सुस्ती को माना जा रहा है।
शासनादेश के तहत विशेष संचारी रोग नियंत्रण मुहिम एक अप्रैल से चल रही है। साप्ताहिक रैंक में प्रदेश में बरेली 50वें पायदान पर आया था। तब जिम्मेदारों का तर्क था कि प्रशिक्षण कार्य के चलते कार्यों की शुरुआत में देरी हुई। फिर 68वीं रैंक पर पहुंचा तो जिम्मेदार मूकदर्शक बने रहे। अब आठ पायदान की उछाल के बाद 60वें पायदान पर आया तो जिम्मेदारों ने इसे तीन दिन से चल रही कड़ी मुहिम का नतीजा माना। हालांकि, अभी ज्यादातर कवायदें कागजों पर ही रफ्तार भर रहीं हैं।
जारी रिपोर्ट में जिला पंचायत राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, कृषि एवं कृषि रक्षा विभाग, पशुपालन विभाग की सुस्ती को रैंक लुढ़कने की वजह माना जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां पूरी हैं। मंगलवार को जारी रैंक संबंधी बैठक स्वास्थ्य विभाग में हुई। विभागों को आवंटित कार्य तेजी से पूरा करने को कहा गया।
दस विभागों को मिली है संचारी मुहिम में जिम्मेदारी
अबकी बार अभियान को सफल बनाने के लिए शासन ने दस विभागों की संयुक्त कार्ययोजना बनाई है। स्वास्थ्य विभाग के अलावा बाल विकास सेवा पुष्टाहार विभाग, नगर निगम, नगर निकाय, जिला पंचायत राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, जिला पंचायत, कृषि रक्षा विभाग, पशुपालन विभाग, जलकल विभाग शामिल हैं। 30 अप्रैल तक अभियान जारी रहेगा। अंतिम दिन तक क्या प्रगति रही, यह रिपोर्ट भी जारी होगी।
फॉगिंग रोस्टर तय पर मशीनों की कमी परेशानी
नगर निगम और निकाय को मच्छरों से निजात के लिए नाला-नाली सफाई और फॉगिंग का कार्य मिला है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी एसीएमओ डॉ. भानु प्रकाश के मुताबिक सात मशीनों से 80 वार्डाें में फाॅगिंग होनी है। एक वार्ड में दिन भर में दो से तीन क्षेत्र में कार्य हो पाता है। बीते दिनों रोस्टर तय न होने से कार्य प्रभावित रहा। अब तेजी की उम्मीद जताई है। हालांकि, पार्षदों ने नगर निगम की फॉगिंग से इन्कार किया है।
इन कामों में पिछड़े ग्राम्य विकास और जिला पंचायत विभाग
1188 ग्राम पंचायतों में ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग को संयुक्त कार्य के निर्देश हैं। अब तक 2362 लक्ष्य के सापेक्ष 1751 प्रभात फेरी ही निकाली गई हैं। झाड़ियों की कटाई, साफ-सफाई 6275 स्थानों पर होनी थी, लेकिन 4349 स्थान पर ही कार्य हुआ। वहीं 1188 पंचायत के सापेक्ष 892 में ही जागरूकता बैठक हुईं। नालों की सफाई भी 7541 के सापेक्ष 5557 ही हुई। उथले हैंडपंप का चिह्नीकरण भी 20,618 के सापेक्ष 16,458 का ही हुआ।
पेयजल: 200 हैंडपंप की अभी नहीं हुई रीबोरिंग
रिपोर्ट के अनुसार 20 अप्रैल तक शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए चिह्नित 967 खराब इंडिया मार्का हैंडपंप के सापेक्ष 792 ही रीबोर हुए हैं। इसके अलावा करीब छह सौ से ज्यादा हैंडपंप की मरम्मत नहीं हुई। करीब तीन सौ हैंडपंप का प्लेटफार्म नहीं बना है। जलभराव निस्तारण के लिए अभी करीब 300 गड्ढों की भराई नहीं हो सकी है। वहीं, पशुपालन विभाग और कृषि विभाग ने भी जागरूकता संबंधी 50 फीसदी ही कार्य किए हैं।
- अवकाश और अन्य वजहों से इस बार काम तेजी से नहीं हो पा रहे हैं। बचे जो कार्य हैं, उन्हें जल्द पूरा करने के लिए टीमों को निर्देशित किया गया है। - धर्मेंद्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी
- रैंक में इस बार उछाल दर्ज हुई है। ब्लॉकवार समीक्षा के दौरान कम इंडीकेटर वाले ब्लॉकों में योजनानुसार आशा कार्यकर्ता अन्य टीमों को कार्य के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ