फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गूगल और इंटरनेट के दौर में रेडियो की दीवानगी बरकरार

विज्ञापन
The craze for radio continues in the age of Google and the Internet
विज्ञापन
बरेली। आज रविवार को विश्व रेडियो दिवस है। रेडियो की शुरुआत अब से 116 साल पहले हुई थी और कुछ ही वर्षो में जन-जन का प्रिय बन गया। सरकारी रेडियो स्टेशन आकाशवाणी से एफएम तक का बड़ा इतिहास है। लोगों का लगाव इतना बढ़ा कि अब निजी एफएम (रेडियो) तक खुल गए और मोबाइल के जरिये हर हाथ में पहुंच गया। आज गूगल और इंटरनेट के दौर में भी तमाम लोग रेडियो के दीवाने हैं।
विज्ञापन

विश्व रेडियो दिवस मनाने का अपना एक अलग इतिहास है। 13 फरवरी 2012 से यूनेस्को से पूरी दुनिया में ‘विश्व रेडियो दिवस’ मनाया गया। इस दिन रेडियो के संचार माध्यम के विषय में बातें की गई और प्रचार प्रसार किया गया। बरेली में स्थानीय रेडियो स्टेशन 1993 में शुरू हुआ। पहले यहां का प्रसारण साढ़े नौ घंटे तक का होता था, जो घट कर चार घंटे रह गया है। बाकी समय में विविध भारती के कार्यक्रम प्रसारित होने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर बच्चों का अंकुर, महिलाओं का घर अंगना, नारी संसार जैसे कई कार्यक्रम बंद हो गए हैं। अब तीन शिफ्टों की जगह केवल दो-दो घंटे की दो ही शिफ्ट रह गई हैं। श्रोता चाहते हैं कि सुबह से लेकर रात 11:20 पर समाचार आने तक यहीं के कार्यक्रम प्रसारित हों। नहीं तो पूर्व की भांति तो कार्यक्रम का समय होना ही चाहिए।
विज्ञापन

आकाशवाणी सरकार का माध्यम : बरेली आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिशासी प्रवीण कुमार कहते हैं कि आज पूरे भारत में ढाई सौ ट्रांसमीटर हैं। विभिन्न भाषाओं में, विभिन्न अंचलों में इसका प्रसारण होता है। यह हर चीज के लिए है हर विषय आकाशवाणी के कार्यक्रम में सामहित है। यह गरीबों के लिए है जो जमीनी स्तर तक जुड़ा हुआ है। यह सरकार का चैनल है। जो भी बात है सरकार अपनी बात अपने माध्यम से कहलवा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें