बरेली। ''''संभल में हुई हिंसा चुनाव में हारे हुए लोगों की देन है। सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने मुसलमानों को भड़काकर शैतान के रास्ते पर भेज दिया। एक तरफ वह कानून पर भरोसा करते हैं, दूसरी ओर दंगा करवाते हैं। यह कौन सा कानून है? यह कहां की इंसानियत है? पत्थर ही मारने थे तो अपनी कमेटी और नेताओं को मारते। देश दंगे से नहीं, कानून से चलेगा। मुस्लिम अगर वोटों की राजनीति के पीछे का सच जान गए तो कई नेताओं की दुकान बंद हो जाएगी।''''
आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने ये बातें कहीं। वह सोमवार को भारतीय सद्भावना मंच की ओर से राजकीय इंटर कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित ''''आओ जुड़ें अपनी जड़ों से'''' कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह प्रकरण लंबे समय से चल रहा है। दोनों पक्षों ने स्वयं ही कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट या सरकार उनके पास नहीं आई। कोर्ट के आदेश पर ही सर्वे किया जा रहा था। अगर किसी को इससे नाराजगी थी तो वे अपने पक्षकार या सांसद से कह सकते थे कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा नहीं।
छह महीने से प्रक्रिया चल रही थी। पत्थर बरसाने, दंगा करने की क्या जरूरत थी? उन्होंने हिंसा के लिए स्थानीय सांसद और विपक्षी दलों को कठघरे में खड़ा किया। मुस्लिमों को दोस्त और दुश्मन को पहचानने की नसीहत दी।
मुतवल्ली पहुंचा रहे वक्फ संपत्तियों को नुकसान
डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि वक्फ संपत्तियों की हिफाजत करने वाले मुतवल्ली ही संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सरकार संपत्तियों को बचाने का कार्य कर रही है। इस दौरान सद्भावना मंच की संयोजिका साध्वी कल्पना, समाजसेवी नदीम शमसी, डॉ. विनोद पागरानी आदि ने डॉ. इंद्रेश को मुकुट पहनाकर सम्मानित किया। शाहीन रजा खानम, जन्नत, राजेंद्र प्रसाद, अखिलेश पाठक, तहसीन रिजवी आदि मौजूद रहे। संवाद