बरेली। नगर निगम एक साल से बंदरों को पकड़ने के लिए जूझ रहा है। इसकी दर बढ़ाकर पांच गुना कर दिए जाने के बावजूद बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं। इस मद में 20 लाख रुपये खर्च के बावजूद शहरवासियों को राहत नहीं मिल सकी है।
सितंबर 2024 तक 157 रुपये की दर से बंदर पकड़े जा रहे थे। इसके बाद फर्म ने हाथ पीछे खींच लिया तो नगर निगम की ओर से पांच गुना महंगी दरों पर आगरा के इमरान कांट्रैक्टर को 779 रुपये की दर से टेंडर दे दिया। बीते वर्ष अप्रैल से 28 सितंबर तक 414 बंदर पकड़े गए थे। वहीं, नया टेंडर होने के बाद 2,287 बंदरों को पकड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शहर में इनका आतंक कायम है। आलम यह है कि रेलवे कॉलोनी के लोग घरों में कैद रहते हैं। क्षेत्र में दो बार बंदर पकड़ने का दावा किया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। जंक्शन परिसर में भी बंदरों का जमावड़ा रहता है।
इन इलाकों में ज्यादा परेशानी
नगर निगम, रेलवे कॉलोनी, जंक्शन परिसर, आजादनगर, आवास विकास कॉलोनी, जनकपुरी, एकतानगर, डीडीपुरम, प्रेमनगर, सुभाषनगर, बदायूं रोड, रामपुर बाग, कैंट, बाग ब्रिगटान, इंदिरा नगर, मुंशीनगर, कटरा चांद खां, ब्रह्मपुरा, करगैना, तिलक कॉलोनी, पटेल विहार, विश्वनाथपुरम, वीरभट्टी, राजेंद्रनगर, जगतपुर, शाहदाना, जोगी नवादा, आलमगिरीगंज, गंगानगर। संवाद
बंदर लगातार पकड़े जा रहे हैं। ईद की छुट्टी के कारण दो दिन काम बंद रहा। बंदरों की मौत की सूचना भी मिली है, लेकिन इसमें हमारा कोई काम नहीं है। वन विभाग की टीम उनके शवों का पोस्टमार्टम करा रही है। - डॉ. नैन सिंह, उपनगर स्वास्थ्य अधिकारी