बरेली। समस्याओं से जूझ रहे अपने बरेली के जिम्मेदार शहरियों और अफसरों को जब अमर उजाला ने मंच दिया तो खुलकर बोले। चाहे जाम की समस्या हो, अतिक्रमण का मुद्दा, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, जलभराव, सीवर लाइन और हाउस टैक्स सभी मुददों पर तमाम सवाल-जवाब हुए। कुछ बड़ी समस्याओं पर निष्कर्ष भी मंथन में निकला तो कुछ पर आगे मिल बैठकर तय करने की बात चली। जाम की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने ट्रैफिक प्लान बनाने का वादा किया तो उद्यमियों ने शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक प्लान में मदद करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने की जिम्मेदारी खुद उठाने की बात कही। जिलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि मंथन का यह कार्यक्रम अंत नहीं शुरुआत है। सभी लोग एक मंच पर आए...तमाम मुद्दों पर बहस हुई तो इनका निष्कर्ष भी निकलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मंथन के कार्यक्रम आगे भी होते रहने चाहिए। मंथन में उठीं समस्याएं और उसपर अफसरों के जवाब के मुख्य अंश-
यह समस्याओं और सुझाव सामने आए
समस्याएं बहुत हैं इनका समाधान जरूरी
उद्यमी शारदा भार्गव ने कहा कि जब तक जीवन है तब तक समस्याएं रहेंगी। इनका इनका निराकरण भी जरूरी है। जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और यह समस्या सबसे बड़ी है। उन्होंने शहर में मल्टीस्टोरी पार्किंग की बहुत जरूरत बताई। डोर टू डोर अच्छा प्रयास था लेकिन पता नहीं क्यों बंद हो गया। अब कलेक्शन नहीं हो रहा है। चौपुला रोड पर जाम की समस्या से लोग रोज जूझ रहे हैं। अतिक्रमण की वजह आप सड़क पर निकल नहीं सकते। भार्गव ने ट्रैफिक लाइट सिस्टम को सुधारने की बात कही और बस अड्डे को शहर से बाहर करने की वकालत की।
दूसरों पर जिम्मेदारी डालने की सोच बदलें
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एके चौहान ने कहा कि आज कल शहर में एक नया कल्चर आया है थ्री व्हीलर कल्चर। कब कौन सा ई-रिक्शा किस गली से निकल आए यह कोई नहीं जानता। इससे समस्या बढ़ गई है। कचहरी के बाहर पैदल नहीं निकल सकते हैं। उन्होंने बताया कि जहां नो पार्किंग है वहां वाहन खड़े रहते हैं। शहामतगंज फ्लाईओवर का काम रुक गया है। डॉ. चौहान ने बताया कि जनसंख्या पर आज कोई बात ही नहीं कर रहा है, जबकि इसकी वजह से आज कई समस्याएं हैं। लोगाें को सोच बदलनी होगी कि यह उनका काम है। जब खुद परेशानी उठानी पड़ती है तब पता चलता है।
अवैध कालोनी हो या अतिक्रमण, हम लोग दोषी हैं
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि, मैं पूछना चाहता हूं कि शहर के काम क्यों नहीं हो पाते हैं। रिंग रोड को लेकर पहले से कवायद चल रही थी यह साकार होते देखकर अच्छा लग रहा है। तीन से चार फिट में कालोनी काट दी गई है और अतिक्रमण लग रहे हैं। इसके सबसे बड़े दोषी हम लोग हैं। सीवर लाइन 60 साल से अधिक पुरानी है। खुशी इस बात की है कि पेयजल के लिए अब पैसा मिल रहा है। दो हजार रुपये से अधिक की योजना का पैसा आ जाए तो और अच्छा है। डेलापीर तालाब, आनंद विहार पर कब्जा हो रहा है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर समस्या कम नहीं हुई है। काम करने वाले अधिकारियों को बयानबाजी की जगह काम करना चाहिए। एयरपोर्ट का काम छह साल में साढ़े 12 करोड़ रुपये अटके रहे।
जलभराव से निपटने को बनाए वाटर हार्वेस्टिंग प्लान
रूहेलखंड मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डा. केशव अग्रवाल ने कहा कि शहर की तीन समस्याएं बड़ी हैं। एक तो शाहजहांपुर रोड, दूसरा अतिक्रमण और तीसरा जलभराव। मैं सिर्फ सुझाव दूंगा। जलभराव से निपटने के लिए मात्र 30 से 35 हजार का खर्च आएगा। छह- छह फिट लंबा चौड़ा और 10 फिट गहरा वाटर हार्वेस्टिंग प्लान बनाया जा सकता है। मैंने इसे खुद बनाया है और यकीन मानिए मात्र दो घंटे में पानी जमीन के अंदर छनकर चला जाता है। इससे पानी भी बचता है और जलभराव भी नहीं होता। अतिक्रमण के लिए नगर निगम को वकील रखकर लगातार नोटिस भिजवानी चाहिए, अगर एक बार नोटिस गई तो दूसरी बार लोग अतिक्रमण करने से बचेंगे। उसी वार्ड में विकास कराएं जहां से टैक्स आए इससे दूसरे लोग भी टैक्स देंगे। शाहजहांपुर रोड का काम जो एजेंसी कर रही है उससे खराब एजेंसी आज तक नहीं देखी। मैने लखनऊ तक यात्रा इस हाईवे की वजह से कम कर दी है। जाता हूं तो ट्रेन से।
शहर को जोनल प्लानिंग की जरूरत
प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना ने कहा कि मास्टर प्लान की तरह शहर को जोनल प्लान की जरूरत है तभी शहर ठीक से बस सकता है। बीडीए नक्शे पास करने का काम ज्यादा करता है जबकि विकास की ओर ध्यान ही नहीं है। अगर ये नए काम में इंटरेस्ट लें तो अच्छा होगा। लोग पार्किंग के नियम पालन नहीं करते हैं, इधर उधर गाड़ियां खड़ी होती हैं। इसके लिए बेसमेंट पार्किंग की जरूरत है। मुझे लगता है कि जमीन के अप्रूवल को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहिए। उत्तराखंड में 30 फुट की रोड न होने पर रजिस्ट्री नहीं की जाती है यहां भी ऐसा होना चाहिए। शहरी विकास में पेड़ लगाना चाहिए क्याेंकि पेड़ एक लाख लीटर पानी को सोखता है जो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से ज्यादा अच्छा है। होर्डिंग और पोस्टर शहर में ऐसे लगे हैं जैसे कितनी कमाई हो रही है। हम लोग सड़क से अपने रैंप उठा कर चलते हैं। आज फुटपाथ चलने लायक नहीं हैं।
स्मार्ट होने के लिए प्रैक्टिकल होना जरूरी
मारिया डे के चेयरमैन हाजी शकील कुरैशी ने कहा कि स्मार्ट हम खुद हों तभी शहर होगा। प्रैक्टिकल होना जरूरी है। आज शहर को विकास के लिए पैसे की जरूरत है कहां से लाएं यह पैसा। स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट पिछड़ने की बड़ी वजह भी राजस्व की कमी थी। 500 करोड़ रुपये से अधिक का काम आज हो सकता है अगर तीन चीजाें पर ध्यान दें। यहां जरी का जोन बना सकते हैं। इसे मशहूर करने की जरूरत है। बरेली की सब्जियां विदेशों में बहुत मशहूर हैं इसके लिए सब्जी जोन बन जाए। बड़ा बाजार होगा। 500 डॉक्टर मिलकर एक अस्पताल खोलिए देखिए तीन हजार से ज्यादा लोगाें को रोजगार मिलेगा।
समर जॉब चलाएं और छात्रों से ट्रैफिक संभलवाएं
पर्यावरणविद प्रोफेसर डीके सक्सेना ने कहा कि हम लोग 60 हजार करोड़ रुपये का पेट्रोल हर साल ट्रैफिक जाम की वजह से खर्च कर देते हैं जबकि इससे मनरेगा जैसी दो योजनाएं शुरू हो जाएं। अगर ट्रैफिक लाइट सही हो तो .5 फीसदी पेट्रोल बचा सकते हैं। इसलिए ट्रैफिक के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। अमेरिका में समर जॉब चलाए जाते हैं यहां भी छात्रों को ट्रैफिक की जानकारी दे। इससे वे चौराहों पर खड़े होकर हेलमेट न पहनने वाले, सीट बेल्ट न बांधने वाले, मोबाइल पर बात करने वालों को पकड़ेंगे। इससे जो रिकवरी आए उसका 70 फीसदी पैसा छात्राें को देना चाहिए। पार्किंग की समस्या से निपटने के लिए स्कूलों के प्ले ग्राउंड का प्रयोग कर सकते हैं।
जब सिस्टम ही समस्या तो कैसे हो सुधार
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा ने कहा कि जहां सिस्टम ही एक समस्या हो तो वहां स्मार्ट की कल्पना कैसे की जा सकती है। उदाहरण देखिए, अयूब खां में ट्रैफिक लाइट नहीं है और पुलिस नहीं है लेकिन फिर भी ट्रैफिक चलता है। जबकि किला और शहामतगंज में पुलिस तैनात है तो वहां ठेले वाले खड़े रहते हैं और जाम लगता है। नगर निगम स्वास्थ्य विभाग का काम केवल लाइसेंस जारी करना हो गया है। टैक्स पर टैक्स बढ़ता जाए लेकिन काम नहीं होगा। विकास किसी भी गंदी गली से शुरू करनी चाहिए।
जाम की समस्या से निपटने के लिए डिवाइडर जरूरी
डा. विकास वर्मा ने कहा कि डेलापीर पर जाम रहता है इससे निपटने के लिए गल्लामंडी तक एक डिवाइडर बना दिया जाए तो सहूलियत होगी। डेलापीर तालाब में मच्छरों के लार्वा पनपने लगे हैं इससे आगे बड़ी समस्या हो सकती है। नीली और हरी डस्टबिन का पूरे देश में अभियान चल रहा है लेकिन हमारे शहर में एक भी नहीं दिख रहे हैं। किसानों के दर्द को भी समझना जरूरी है। मैने खुद बीज खरीदी है लेकिन उसमें खरपतवार मिली पाई गई। किसानाें को मृदा कार्ड बनवाना हो तो यह फ्री होना चाहिए लेकिन इसके पैसे लिए जाते हैं। खाद बनाने की ट्रेनिंग को 25 हजार रुपये लिए जाते हैं। फूलों की खेती के लिए कई स्कीम है लेकिन कोई जानकारी नहीं देता है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को भी उद्योग के रूप में लें
उद्यमी घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि समस्या शहर में नई बात नहीं है। हर शहर समस्या से जूझकर बड़ा शहर बनता है। कृषि के बाद उद्योग ही सबसे बड़ा रोजगार देता है लेकिन इस पर कोई विचार नहीं किया जाता। उद्योग पर कानून इतने बने है कि 20 किताब लिख दी जाएगी, लेकिन सहूलियत कितनी देते हैं। उद्योग को पनपने के लिए प्रयासरत हूं लेकिन दो से ज्यादा लोग नहीं आए और 100 करोड़ से ज्यादा इंवेस्ट नहीं करना चाहता। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को एक उद्योग की तरह लेना चाहिए। तीन हजार लोगों को इससे रोजगार मिलेगा। परसाखेड़ा में एक नाला बनवाने के लिए 11 जिलाधिकारियों से उद्यमी मिल चुके हैं तब तो काम हुआ नहीं।
शहर में समस्याएं जस की तस है
आईएमए प्रेसीडेंट (इलेक्टेड) प्रमेंद्र माहेश्वरी ने कहा कि झूठी बात पर जो वाह- वाह करेंगे, वे ही लोग शहर तबाह करेंगे। शहर में आज भी समस्याएं जस की तस हैं यह कभी ठीक ही नहीं हुई। सुभाषनगर पुलिया के जलभराव से निपटने के लिए आज तक कोई प्लान नहीं बनाया गया। बाकरगंज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर भी कुछ नहीं हुआ। डेलापीर में तालाब पर कब्जा हो रहा है। संजयनगर और चौपुला के लिए क्या प्लान बनाया है जहां सबसे अधिक समस्या है। इन सब के जवाब शहर को चाहिए। जबकि हम लोग सहयोग करने को तैयार हैं।
स्मार्ट नहीं शहर को सुजला, सुफला, शस्य श्यामला बनाएं
तुलसीमठ के महंत कमल नयन दास ने कहा कि शहर को स्मार्ट बनाने से अच्छा है कि इसे सुजला, सुफला, शस्य श्यामला बनाया जाए। अगर पेयजल साफ हो, फल अच्छे हो और पर्यावरण ठीक हो तो शहर अच्छा होने से कोई नहीं रोक सकता। जब मै आठ साल का था तो रामगंगा का जल बहुत शुद्ध था लेकिन आज यह अशुद्ध हो गया है। बरेली का सारा सीवर का पानी रामगंगा में मिलता है। हमारा अस्तित्व खतरे में हैं। आप अलखनाथ और तुलसीमठ आइए यहां प्रयोग पानी को खेताें में डालते हैं। बरेली बंगलुरु से बहुत अच्छी है यहां हवा अभी भी शुद्ध है। जनसंख्या पर रोक लगाना जरूरी है।
जिम्मेदारों ने यह दिया जवाब
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मेयर के पास थे सभी सवालाें के जवाब
मेयर डॉ. आईएस तोमर ने कहा कि पार्टी चाहे कोई भी हो नेता हमेशा झूठ बोलकर वोट लेते हैं। अच्छे दिन तभी आएंगे जब हम खुद अच्छे होंगे। मेयर ने डोर टू डोर के लिए विश्वास दिलाया कि एक माह में शहर में कूड़ा अच्छे से उठना शुरू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रो प्लानिंग इस जनसंख्या के साथ नहीं कर सकते हैं।
टैक्स- कामर्शियल नियमावली में दिक्कत है जो पिछली सरकार से लेकर इस सरकार को भी बताया जा चुका है। नगर विकास मंत्री से भी बात हो गई है। उन्होंने वादा किया है कि इस पर विचार करेंगे और आशा है कि कुछ अच्छा होगा।
होर्डिंग- शहर से होर्डिंग हटा दिए गए थे लेकिन एडवरटाइजर ने घेराव कर लिया। हमने नई नियमावली बना दी है जिससे विज्ञापन का एरिया चिह्नित कर लिया गया है। यह लागू होते ही सुविधा होगी।
अतिक्रमण- अतिक्रमण तीन तरह के हैं। शौकिया, जरूरत और जबरदस्ती। शौकिया वे लोग हैं जो अपनी दुकान के सामने अतिक्रमण करवाते हैं। जरूरत का अतिक्रमण उनके लिए है जिनके यहां शाम को दुकान लगाए बिना चूल्हा नहीं जलता। जबरदस्ती अतिक्रमण वाले वे हैं जो कचहरी और डीएम कार्यालय के सामने बैठते हैं। इनके लिए फेरी नीति बनाई गई एजेंसी ने सर्वे किया लेकिन वह भाग गई।
ट्रैफिक जाम- ट्रैफिक लाइट व्यवस्थित कराने का काम पुलिस का है लेकिन उनके पास पैसा नहीं तो यह काम भी अब हम करेंगे। कुतुबखाना फ्लाईओवर के लिए जरूरी प्रयास शुरू हो गए हैं। बस स्टैंड को शहर से बाहर निकालने के लिए भी सेटेलाइट के पास जगह बताई गई है।
अधिकारी बोले--
लोगों की मानसिकता बदलनी जरूरी
जिलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि हम लोगों को आय बढ़ाने पर चर्चा करनी चाहिए। टैक्स घटाने पर तो बात होती है लेकिन टैक्स में इंटरेस्ट कितने लोग लेते हैं। अमेरिका में कोई टैक्स दे या न दें लेकिन निगम का टैक्स देना जरूरी है। यहां आमदनी का 40 फीसदी टैक्स दिया जाता है। हमारे यहां तो छिपे टैक्सदाता बहुत हैं। आप यकीन नहीं करेंगे कानपुर में साढ़े 4 लाख मकान में केवल डेढ़ लाख लोग ही कर के दायरे में थे। इसे सेटेलाइट से बढ़ाया गया। आज कानपुर मजबूत है। इसका विरोध भी हुआ। यही मानसिकता बदलने की जरूरत है। अतिक्रमण में मानवीय पहलू भी जुड़ा है। हम रोज चालान नहीं कर सकते हैं। उद्यमी सहयोग करें तो टाउनशिप विकसित करने में कोई समस्या नहीं होगी।
शहर की परिभाषा इमारत व सड़क से पूरी नहीं होती
बीडीए उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार ने कहा कि संतुलित और सुनियोजित विकास के लिए आम शहरी की मानसिकता व सोच में परिवर्तन जरूरी है। हजारों लोग फुटपाथ पर सोते हैं और खुले में शौच जाते हैं। मैं तो सोच में पड़ गया कि शहर में 50 फीसदी हिस्से में सीवर लाइन ही नहीं है। गीता में श्लोक है कि बड़े लोग जैसा आचरण करेंगे वैसा ही जनता आचरण करती है। अगर हम ही बिजली चोरी, टैक्स चोरी, अतिक्रमण करेंगे तो जनता भी करेगी। पैसा नहीं है तो उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल करें। अगर हर व्यक्ति अपने पद और अपने स्तर पर दायित्व का सौ फीसदी पूरा करे तो हर समस्या का समाधान हो जाएगा।
हम अपने अधिकार जानते हैं लेकिन ड्यूटी नहीं
नगर आयुक्त आरके श्रीवास्तव ने शुरूआत पूर्वजों के आशीर्वाद जीवेम शरदं शतम और दूधो नहाओ पूतो फलो याद दिलाकर की। उन्होंने बताया कि आज यह आशीर्वाद नहीं दे सकतेे हैं क्योंकि जनसंख्या बहुत बढ़ गई है और इतनी सुविधाएं नहीं है। नगर आयुक्त ने बताया कि हमारे देश में लोग बहुत जागरूक हैं और अपने अधिकारियाें को जानते हैं। यह बात नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी कही है। लेकिन लोग अपनी ड्यूटी नहीं जानते हैं। पूरा सिस्टम तो गलत हो नहीं सकता है। कुछ हम लोग भी गलत हैं। उन्होंने कहा कि अवैध डेयरी वालों ने शहर में कहर ढा रखा है। तीन इंच की पाइप से गोबर को ड्रेनेज में बहा देते हैं। ओडीएफ के लिए भी हम तत्पर हैं।
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ये हुए फैसले
सीसीटीवी कैमरों से लैस होगा शहर
इंवर्टिस विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. उमेश गौतम ने कहा कि शहर मिलकर अच्छा बनता है। पहले भी हमने शौचालय बनवाये हैं। सिविल लाइंस में हमारे घर के पास सीवर लाइन नहीं है लेकिन टैक्स देते आ रहे हैं। नागरिक जरूरत से ज्यादा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर पर हम भी खर्च करने को तैयार हैं। सीसीटीवी कैमरे से प्रमुख इलाकों को सुरक्षा के घेरे में लाया जा सकता है। 100 कैमरे हम आज देने को तैयार हैं। हर मोड़ पर कैमरे लग जाएंगे। उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर अपनी बात रखी, कहा कि यह प्लांट गलत जगह लगाया गया था। यहां बच्चे पढ़ते हैं और गांव है। उनको परेशानी होगी। डॉ. गौतम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने के लिए सहयोग करने की बात कही। उन्होंने नगर आयुक्त से कहा कि वे आज एक करोड़ रुपये की एफडी उनसे करा लें और जहां जमीन मिले वहां उसका प्रयोग करें। जमीन दिलाने को भी मैं प्रयासरत हूं।
ट्रैफिक सुधार को बनेगा प्लान
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने ट्रैफिक की समस्या को गंभीरता से लिया। उन्होंने आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना को निमंत्रण दिया कि वे उनके कार्यालय आएं और साथ में बैठकर ट्रैफिक के लिए प्लान बनाने में मदद करें। कैमरे उपलब्ध कराने पर उन्होंने इंवर्टिस विश्वविद्यालय के चांसलर उमेश गौतम और बीएल एग्रो के एमडी घनश्याम खंडेलवाल का धन्यवाद दिया। एसएसपी ने कहा कि कैमरे मिलते ही 15 दिन के अंदर इन्हें शहर में लगा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई ट्रैफिक प्लान को लेकर सुझाव देना चाहता है तो जरूर दे। पुलिस को लेकर लोगाें में डर और मानसिकता पर उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों की स्वतंत्रता को बांध देती है इसलिए लोग उनके पास जाने से हिचकते हैं।