उर्स-ए-रजवी के मौके पर पूरा शहर आला हजरत के रंग में रंग गया है। बड़ी संख्या में जायरीन की आमद से शहर के रास्ते गुलजार हैं। सभी होटल गेस्ट हाउस फुल हो चुके हैं। बाजारों में भी रौनक देखते ही बनती है। दरगाह से उर्स स्थल तक नूर की बारिश से सराबोर है।
इस अकीदत और पुरनूर माहौल के साथ उर्स अपने शबाब पर रहा। दरगाह शरीफ पर जायरीन के हाजरी देने का तांता सुबह से लगातार जारी रहा। इसी बीच शहर की हर गली, मोहल्लों और कस्बों से चादरों के जुलूस लगातार दरगाह पहुंचते रहे। इसमें डेढ़ा, ठिरिया, किला, इज्जतनगर, कैंट, पुराना शहर के कई इलाकों और शहरी मोहल्लों से चादरों के सैकड़ों छोटे बड़े जुलूस रहे। पिछले दो दिनों में शीशगढ़ और शाही, से भी 91-91 मीटर की चादरें पेश की गई। ठिरिया निजावत खां, स्वालेनगर और आजमनगर से सैकड़ों चादरें जुलूस के रूप में पहुंच चुकी हैं। जो 91 मीटर से लेकर डेढ़ सौ मीटर तक की चादरें हैं।
इन चादरों के जुलूस के रेले में दूर दराज से आए जायरीन बामुश्किल तमाम दरगाह तक पहुंच कर हाजरी दे पा रहे थे। इसमें महिलाओं की भी बड़ी संख्या थी। इधर शहर के हर प्रमुख बाजारों में देश-विदेश के तमाम जायरीन घूमते और खरीदारी करते नजर आए। खाने के होटलों से लेकर चाय-पान की दुकानों तक पर जायरीन की टोलियां नजर आईं। खास तौर से सिविल लाइंस, बड़ा बाजार, रोडवेज, बिहारीपुर, मलूकपुर आदि इलाकों के बाजारों में जायरीन ने खरीदारी की और शहर का नजारा भी लिया। बाहर के जायरीन हों या शहर के अकीदतमंद, हर जुबान पर आला हजरत के उर्स की चर्चा है।
गली-गली हो रहा है लंगर
बरेली। उर्स में आए जायरीन के लिए न सिर्फ दरगाह शरीफ बल्कि आला हजरत के चाहने वालों ने शहर में जगह-जगह लंगर की व्यवस्था की है। इधर बिहारीपुर सौदागरान से किला तक हर गली मोहल्ले और इसी तरह पुराना शहर के इलाकों में जहां-जहां भी जायरीन ठहरे हैं, हर जगह लंगर की व्यवस्था की गई है। शहर में उर्स स्थल और उसके आसपास के तमाम इलाकों में भी लंगर चल रहे हैं।