उर्स-ए-रजवी के दूसरे रोज मुफ्ती आजम हिंद और रेहाने मिल्लत के कुल शरीफ में भारी संख्या में जायरीन ने शिरकत कर अकीदत का इजहार किया। उलमा ने इस्लाम की तस्वीर पेश करते हुए बुजुर्गों के अमल और संदेश को आम किया।
इस्लामिया ग्राउंड के मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए दरगाह प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने दरगाह प्रमुख अल्लामा सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां के जारी निर्देश को सुनाया। उन्होंने कहा कि आज हिंदुस्तान में फिरकापरस्त ताकतें नफरत का माहौल पैदा कर रही हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम हिकमत और मंसूबाबंदी से काम लें।
मुफ्ती मोहम्मद आकिल ने कहा कि अकीदे के साथ आमाल की इस्लाह भी इंतेहाई जरूरी है। मुफ्ती सैय्यद कफील अहमद ने कहा कि आज हमारा समाज बदअमालियों के दलदल में फंसा जा रहा है। हमें चाहिए कि हर हाल में इस्लाम के दिशा-निर्देश का पालन करें। कारी अब्दुर्रहमान ने कहा कि हजरत रेहाने मिल्लत ने इस्लाम और सुन्नियत के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया। मौलाना डा. एजाज अंजुम ने कहा कि हजरत रेहाने मिल्लत के सियासत को दीन के लिए प्रयोग किया था। मुफ्ती अय्यूब खां ने रेहाने मिल्लत की जिंदगी पर रोशनी डाली। सुबह 9.58 बजे हजरत रेहान रजा खां रेहानी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
दरगाह शरीफ पर दिन भर जायरीन की हाजरी के बीच चादरपोशी व गुलपोशी का सिलसिला चलता रहा। रात में मुफ्ती आजम हिंद के उर्स की महफिल सजी। पहले उर्स प्रभारी सैय्यद आसिफ मियां ने उर्स संबंधी दिशा-निर्देश पढ़ कर सुनाए। मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने सूदखोरी से बचने और इसके खात्मे के लिए बेदारी मुहिम चलाने पर जोर दिया। अल्लामा मुख्तार बहेड़वी ने कहा कि नशाखोरी से बचाने के लिए समाज को जागरूक करने की जरूरत है। कारी सखावत हुसैन, मौलाना जाहिद रजा, मौलाना इकबाल, मॉरीशस के मौलाना नदीन रजा मंजरी ने मुफ्ती आजम हिंद के जिंदगी पर रोशनी डाली।
दोनों जलसे दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी की सरदारत में आयोजित हुए। रात 1:40 बजे मुफ्ती आजम हिंद हजरत मुस्तफा रजा खां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इस दौरान जायरीन से इस्लामिया मैदान से लेकर दरगाह तक रोड पूरी तरह भर गई। दोनों कुल के अंत में अहसन मियां ने दुआ की, सुब्हानी मियां ने शुक्रिया अदा किया।