बरेली। सेटेलाइट और पुराने रोडवेज बस अड्डे के बाहर सड़क पर बसें खड़ी कर सवारियां भरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। बसें रुकती हैं, सवारियां बैठाती-उतारती हैं और उनके पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। देखते ही देखते पूरा इलाका जाम की चपेट में आ जाता है। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण रोजाना हजारों लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है।
दोपहर करीब एक बजे पुराने बस अड्डे के बाहर अलीगढ़ डिपो की बस सड़क पर खड़ी थी। उसमें सवारियां भरी जा रही थीं। इसके अलावा उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के लिए जाने वाली बसें भी सड़क पर खड़ी थीं। बसों के रुकते ही पीछे निजी वाहनों और टेंपो की कतार लग गई। भीषण गर्मी में जाम में फंसे स्कूली बच्चे और अन्य यात्री परेशान दिखाई दिए। कई वाहन चालकों को कुछ दूरी तय करने में ही काफी समय लग गया। वहां से गुजर रहे चौपुला रोड निवासी घनश्याम गंगवार ने बताया कि यह रोज की पीड़ा है। इससे निजात नहीं मिल पा रही है।
सेटेलाइट बस अड्डे के बाहर अपराह्न 1:30 बजे रुहेलखंड डिपो की बस बरेली से लखनऊ जाने के लिए सड़क पर खड़ी मिली। बरेली डिपो की बस शाहजहांपुर, बढ़नी-कृष्णानगर और लखनऊ जाने के लिए सवारियां भर रही थी। शाहजहांपुर डिपो की बस हरदोई जाने वाली सवारियों का इंतजार करती नजर आई। बसों के सड़क पर खड़ी होने से पीछे वाहनों की कतार बढ़ती गई, लेकिन बस चालकों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
ठेले व ऑटो स्टैंड ने बिगाड़ी व्यवस्था
पुराने व सेटेलाइट बस अड्डे के आसपास सड़क किनारे खड़े ठेले और ऑटो भी जाम की समस्या बढ़ा रहे हैं। ये सड़क का काफी हिस्सा घेर लेते हैं। जब बस खड़ी होती है तो आधी से ज्यादा सड़क बाधित हो जाती है। यातायात पुलिस अगर नियमित अभियान चलाकर इन पर कार्रवाई करे तो जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
वर्जन
इज्जतनगर में नया बस अड्डा और वर्कशॉप बनाया जा रहा है। करीब 550 बसों की क्षमता वाला नया बस अड्डा तैयार होने के बाद पुराने और सेटेलाइट बस अड्डे का लोड काफी कम हो जाएगा। सेटेलाइट बस अड्डे को भी पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। - एके वाजपेयी, एआरएम, रुहेलखंड डिपो