बरेली। शेरगढ़ के गांव सीहोर में तीन फरवरी को सा़ड़ के हमले में जागनलाल (65) की मौत के मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। आरोपी ग्राम प्रधान मीना देवी और सचिव श्रीपाल गंगवार को दोषमुक्त माना है। पुलिस के मुताबिक जागनलाल लकवा से पीड़ित थे और भागते हुए सांड़ के सामने आकर घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसमें प्रधान व सचिव का कोई दोष नहीं है। उस समय मुकदमा भावावेश में दर्ज कराया गया था। पुलिस का यह भी कहना है कि उसे कोई साक्ष्य नहीं मिल सका है। संवेदनहीनता की हद तो यह है कि प्रशासन सांड़ तो पकड़ नहीं सका, बुजुर्ग को न्याय भी नहीं दिला पाया। फिलहाल, अब सबकुछ ठंडे बस्ते में चला गया है।
दरअसल, तीन फरवरी को जागनलाल घर के बाहर बैठे थे। उसी दौरान सांड़ ने उन पर हमला बोल दिया। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना से गुस्साए ग्रामीणों मीरगंज-सहोड़ा मार्ग पर जाम लगा दिया था। समाचार पत्रों में खबर छपने के बाद डीएम रविंद्र कुमार ने घटना का संज्ञान लिया और एडीओ पंचायत राजीव कुमार शर्मा व बीडीओ चंद्र प्रकाश पांडेय को भेजकर जांच कराई। जांच में सामने आया कि छुट्टा पशुओं को पकड़वाने में लापरवाही हुई है।
इसके बाद चार फरवरी को एडीओ पंचायत ने ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। शासन ने भी मामले का संज्ञान लिया था। मुकदमा दर्ज होने से नाराज जिलेभर के सचिव, बीडीओ और प्रधानों ने विकास भवन परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया। इसके एक सप्ताह बाद पुलिस ने अब एफआर लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया।
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वादी एडीओ पंचायत राजीव कुमार शर्मा और मृतक के बेटों ने मुझे यह लिखकर दिया है कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव का कोई दोष नहीं है। इसी के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाई है। - सतीश कुमार नैन, इंस्पेक्टर, शाही
मेरे पिताजी की मृत्यु सांड़ के हमले से ही हुई थी। मैंने पुलिस को कुछ लिखकर नहीं दिया है। उस समय जांच करने आए अधिकारियों को मैंने लिखकर दिया था कि कई बार शिकायत के बाद भी छुट्टा पशु नहीं पकड़े गए। पकड़े जाते तो यह घटना नहीं होती। पुलिस ने अपने मन मुताबिक कुछ लिख दिया हो तो मुझे नहीं पता। - रामआसरे, मृतक का पुत्र