बरेली। शहर के यातायात को रफ्तार देने वाले हार्टमन, कुदेशिया और श्यामगंज पुल निर्माण के दस वर्षों के भीतर ही जर्जर हो गए हैं। कहीं ज्वाइंट खराब है तो कहीं सड़क उखड़ गई है। सरिया बाहर झांक रहा है। संबंधित विभाग इनकी मरम्मत नहीं करा रहा है। सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। दोनों विभागों की इस खींचतान में जनता हिचकोले खा रही है।
हार्टमैन ओवरब्रिज सबसे पुराना है, लेकिन इसके भी दस साल पूरे नहीं हुए हैं। इस पुल की सड़क कई वर्षों से खराब है। कई जगह सरिया बाहर निकला हुआ है। बीच-बीच में पैचवर्क करा दिया जाता है। पुल के ज्वाइंट भी अब खुलने की कगार पर आ गए हैं। इनको ठीक कराने की जहमत कोई विभाग नहीं उठा रहा है। यातायात का दबाव अधिक होने से कई बार पुल में कंपन भी होता है।
कुदेशिया ओवरब्रिज का उखड़ा पैचवर्क
कुदेशिया फाटक पर बने ओवरब्रिज की सड़क भी खराब है। कुछ समय पहले ही पीडब्ल्यूडी ने इस पर पैचवर्क कराया था, जो उखड़ गया है। अब फिर सड़क पर गड्ढे हो गए हैं। वहीं गड्ढे ऐसे हैं कि कुछ दिनों में ही सरिया बाहर आ जाएगा। गहरे गड्ढो से हादसों का खतरा बना रहता है। इसकी मरम्मत बेहद जरूरी है।
वर्जन आमने-सामने लगाएं
मेरे पास चार्ज था तो इन पुलों पर पैचवर्क कराया गया था। सेतु निगम ने पुल बनाकर हमें हैंडओवर किया था। अब हमें क्या पता कि कैसा माल डाला है? आरसीसी की सड़क है। डामर की होती तो पूरी सड़क नई डाल दी जाती। जहां गड्ढे हुए हैं, उनको दोबारा ठीक कराएंगे। - सत्येंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
निर्माण के एक साल बाद सेतु निगम पुल को हैंडओवर करता है। इसके बाद भी एक साल तक जिम्मेदारी सेतु निगम की होती है। पुल संचालन शुरू होने के दो साल बाद जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की होती है। हमारे यहां बनाने का और उनके यहां मरम्मत का बजट आता है। - अरुण गुप्ता, उप परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
संवाद