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Bareilly News: अड़चन दूर, बैरियर-2 से बड़ा बाइपास तक सिक्स लेन होगी सड़क

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बरेली। बैरियर-2 से बड़ा बाइपास तक सड़क के चौड़ीकरण में आ रही संरक्षित वन क्षेत्र की अड़चन दूर हो गई है। आंवला तहसील के तीन गांवों में गैरवानिकी भूमि मिल गई है। अब इसके बदले वहां पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही, सड़क को टू से सिक्स लेने करने की प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी। इससे शहरवासियों को एयरपोर्ट जाने-आने में सहूलियत होगी। पीलीभीत और उत्तराखंड की ओर आने-जाने वाले वाहनों को रफ्तार मिलेगी।
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सेटेलाइट बस अड्डे से पीलीभीत होते हुए उत्तराखंड के टनकपुर तक 71 किलोमीटर का मार्ग फोरलेन है। जहां फोरलेन नहीं है, वहां चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी मार्ग पर शहर के बैरियर टू से बड़ा बाइपास तक 3.9 किलोमीटर हिस्सा टू लेन ही है। इसके चौड़ीकरण की कवायद आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
मंडलायुक्त के हस्तक्षेप पर बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने सड़क को टू से सिक्स लेन करने की जिम्मेदारी ली। टेंडर निकालकर निजी कंपनी को काम सौंपा, पर बीच में संरक्षित वन क्षेत्र की अड़चन पड़ गई। बीडीए उपाध्यक्ष मनिकंडन ए ने संरक्षित वन क्षेत्र के पेड़ों के बदले दूसरी जगह पौधरोपण करने के लिए जिलाधिकारी से जमीन मांगी थी। दो माह से जारी तलाश आंवला तहसील क्षेत्र में पूरी हुई।
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बीडीए की सचिव वंदिता श्रीवास्तव ने डीएफओ को पत्र भेजकर बताया है कि 7.4 हेक्टेयर संरक्षित वन क्षेत्र के बदले गांव इस्लामनगर उर्फ दलीपपुर में श्रेणी-5 की 3.628 हेक्टेयर, नौगवां में 1.642 हेक्टेयर और जगन्नाथपुर में 2.428 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसका निरीक्षण कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अपेक्षा की गई है। मुख्य अभियंता एपीएन सिंह ने बताया कि जमीन नहीं मिलने से सड़क के चौड़ीकरण के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी नहीं मिल पा रही थी। अब जल्दी ही एनओसी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही काम शुरू हो जाएगा।

लोक निर्माण विभाग ने पिछले साल सेटेलाइट से बड़ा बाइपास तक सड़क को सिक्स लेन कराने के लिए 300 करोड़ रुपये का एस्टीमेट शासन को भेजा था, पर बजट नहीं मिला। अब बीडीए ने 3.9 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण की जिम्मेदारी ले ली है तो 7.420 किलोमीटर हिस्सा ही शेष रह गया। इसके चौड़ीकरण के लिए अब 216 करोड़ रुपये चाहिए। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि एस्टीमेट मुख्यालय को भेज दिया है। मंजूरी का इंतजार है।


बड़ा बाइपास से सेटेलाइट तक मार्ग को सिक्स लेन करने के लिए तीन साल से कवायद चल रही है। वर्ष 2022 में पहली बार इसका प्रस्ताव तैयार हुआ था। फिलहाल, धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार है।
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