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भाजपा ने सब कुछ दिया.. फिर सीएम न बनने की टीस कैसी?

Wed, 15 Nov 2017 01:47 AM IST
बरेली।
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केश्‍ाव प्रसाद माौयऱ्र्य
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 सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा हाईकमान ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पिछड़े वर्ग (खासतौर से बसपा का वोट बैंक माने जाने वाले मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज) को पार्टी से जोड़ने के लिए दांव चला जो सटीक साबित हुआ। विधानसभा चुनाव में केशव ने खूब मेहनत की। रिकार्ड 325 सीटें मिलीं तो वह पार्टी में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार समझे जाने लगे। हालांकि सीएम के पद पर ताजपोशी हुई योगी आदित्यनाथ की, केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री पद मिल पाया। हालांकि महेंद्र नाथ पांडेय के नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी केशव प्रसाद मौर्य की भाजपा संगठन पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसीलिए पार्टी हाईकमान ने उन्हें निकाय चुनाव जिताने की भी जिम्मेदारी सौंपी है। शाहजहांपुर, बदायूं और बरेली में रात्रि विश्राम कर उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाया है। कार्यकर्ता सम्मेलन कर संगठन में भी जोश भरा। सभी को यथायोग्य सम्मान की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए टिकट के दावेदारों और असंतुष्टों के गिले-शिकवे भी दूर किए। ऐसे कई मुद्दों पर अमर उजाला ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से विधायक डीसी वर्मा के आवास पर खास बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश---
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सवाल :  बरेली के चुनाव के बारे में आपने क्या महसूस किया?  
जवाब : मेयर टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं की कुछ शिकायतें थीं जिन्हें निपटा लिया गया। हमारा (भाजपा) कार्यकर्ता देवतुल्य है। जिनको टिकट नहीं भी मिला, वे भी भाजपा प्रत्याशी के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। निकाय चुनाव में भाजपा की लहर लोकसभा और विधानसभा से भी तेज है। हमारा संगठन बूथ तक मजबूत है। सपा, बसपा और कांग्रेस तो मुकाबले में ही नहीं है। भाजपा निकाय चुनाव भारी बहुमत से जीतेगी। 
सवाल : बरेली में तीन मंत्रियों (संतोष गंगवार, राजेश अग्रवाल, धर्मपाल सिंह) के होने के बाद भी आपको आना पड़ा? 
जवाब : कोई भी चुनाव हो, भाजपा उसे गंभीरता से लेती है। उसी दिशा में हम सब मिलकर काम करते हैं। पार्टी जहां जिसको भेजती है, वह वहां जाकर पार्टी के लिए काम करता है। अभी हमें बनारस जाना है। अब, आप कहेंगे कि वहां तो प्रधानमंत्री मोदी जी खुद हैं, मेरी क्या जरूरत.. तो ऐसा नहीं है। भाजपा में हर किसी भी भूमिका है। 
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सवाल : भाजपा से बरेली में मेयर की कुर्सी 15 साल से दूर है, इस बार क्या रणनीति है ?
जवाब : नगर निगमों में तो हम तब भी जीते हैं, जब भाजपा न सूबे में सरकार में थी, न केंद्र में। अब तो केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। हमारा कार्यकर्ता चुनाव जीतना जानता है। वह इसका सबूत बरेली की सभी दो लोकसभा और नौ विधानसभा सीटें जिताकर दे चुका है। 
सवाल : मुस्लिम मतों के सपा के पक्ष में ध्रुवीकरण पर भाजपा की क्या रणनीति है?
जवाब : हम जाति और धर्म के तुष्टीकरण में विश्वास नहीं रखते। फिर भी अगर सपा ने मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण कराने की कोशिश की तो बहुसंख्यक हिंदू समाज भाजपा के पक्ष में खड़ा होगा। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में विपक्ष यह देख चुका है। उम्मीद है कि वह ऐसा नहीं करेंगे। 
सवाल : मान लीजिए, निकाय चुनाव में भाजपा हारती है तो मुख्यमंत्री बदला जा सकता है
जवाब : इस सवाल का हमारे पास कोई जवाब नहीं है। न मैं इसका उत्तर दे सकता हूं। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि निकाय चुनाव भाजपा हर हाल में बड़े अंतर से जीत रही है।  
सवाल : विधानसभा चुनाव के बाद आप मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, मन में कहीं टीस तो नहीं है ?
जवाब : भाजपा ने हमें विधायक बनाया, फिर सांसद और प्रदेश अध्यक्ष बनाया। अब डिप्टी सीएम बनाया है। हमें सब कुछ तो पार्टी ने दिया है। फिर मन में टीस किस बात की रह जाएगी। हमें हमेशा पार्टी नेतृत्व  में विश्वास रहा है। वहां से जो भी फैसला हुआ, वह हमेशा बेहतर था।  
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