बरेली। कोरोना संक्रमण क्या फैला अपने बेगाने हो गए। श्मशान भूमि के स्टोर में मृतकों के अस्थि कलश आज भी अपनों का इंतजार कर रहे हैं। स्टोर में इतने अस्थि कलश हो गए हैं कि नये अस्थि कलश रखने की जगह तक नहीं बची है। ऐसे में उन्हें पेड़ की डाल या बाहर फर्श पर रखना पड़ रहा है। कोरोना का खौफ इस कदर सिर चढ़कर बोला कि कई मृतक संक्रमितों के परिजनों ने अस्थि कलश रखवाए ही नहीं। अंत्येष्टि के बाद अस्थियों को राख के साथ फूल ऐसे ही फेंक दिए गए।
अस्थि कलशों की पड़ताल के लिए गुरुवार को अमर उजाला की टीम गुलाब बाड़ी श्मशान भूमि पहुंची। यहां पर करीब सवा सौ से ज्यादा अस्थि कलश रखे हुए मिले। श्मशान भूमि की रखवाली कर रहे सोमपाल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते अंत्येष्टि के बाद करीब 20 फीसदी लोग अस्थियां प्रवाहित करने नहीं ले गए, जिसके चलते अब स्टोर में भी उन्हें सहेजने की जगह नहीं बची। बताया कि अब तक सात संक्रमितों की अंत्येष्टि श्मशान भूमि पर हो चुकी है। इनमें नवादा शेखान के एक मृतक संक्रमित के परिजन ने ही फूल सिराने के लिए रखवाए हैं। तीन मृतक संक्रमित जिनका शवदाह हुआ वे दूसरे जिलों के थे। चिता में अग्नि लगाकर दस मिनट बाद ही चले गए। चिता जलने के बाद बचे फूल को भी जब रखवाने वाला कोई नहीं था तो उन्हें राख के साथ ही फेंक दिया गया। बताया कि माह में करीब 25 शवदाह हो रहे हैं।
संजयनगर श्मशान भूमि: इंतजार में 150 से अस्थिकलश
संजय नगर श्मशान भूमि पर भी कई मृतक संक्रमितों की अंत्येष्टि की गई। करीब डेढ़ सौ से ज्यादा अस्थि कलश यहां रखे हुए हैं। जिसमें बीते साल पितृपक्ष से लेकर अब तक के फूल हैं। श्मशान भूमि के कर्मचारियों के मुताबिक संक्रमित का शवदाह होने से उन्हें भी संक्रमण का खतरा रहता है मगर ईश्वर का काम समझकर वे घबराते नहीं। हालांकि, संक्रमित के परिजन फूल नहीं सिराते। उन्होंने बताया कि संक्रमित के फूल श्मशान भूमि पर नहीं है।
शवदाह तक नहीं रुकते परिजन
श्मशान भूमि पर मौजूद लोगों के मुताबिक पहले तो कुछ परिजन शवदाह के लिए भी आना नहीं चाहते। किसी तरह प्रशासन, पुलिस या स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें बुलाया जाता है तो वे चिता में आग लगाकर दूर खड़े हो जाते हैं और फिर शवदाह के बाबत जो भी राशि तय होती हैं, वह देकर चले जाते हैं। फूल आदि सिराने की कोई बात ही नहीं करता।
सिटी श्मशान भूमिः प्रवाह के इंतजार में रखीं वर्ष 2017 से रखी अस्थियां
बरेली। सिटी श्मशान भूमि पर अंतिम संस्कार करने वाले ऐसे लोगों की संख्या सर्वाधिक है जो बुजुर्गों का अंतिम संस्कार कर उन्हें भुला बैठे हैं। कुछ अस्थि कलश तो वर्ष 2017 से यहां मुक्ति की बाट जोह रहे हैं लेकिन इनके परिवार वाले अंतिम संस्कार के बाद लौटकर ही नहीं आए।
शहर के सबसे बड़े सिटी श्मशान भूमि में इस समय चार सौ से ज्यादा लोगों की अस्थियां रखी हैं। इनमें से कुछ वर्ष 2017 और 2018 की भी हैं। सुपरवाइजर त्रिलोकी नाथ शर्मा ने बताया कि इनमें से करीब दो सौ से ज्यादा लोगों की अस्थियां इस वर्ष से पूर्व की हैं। इसके चलते श्मशान भूमि पर अस्थियां रखने की जगह नहीं बची है। ऐसे में जमीन पर रखने के चलते कई अस्थि कलश फूट गए हैं और उनमें भरी अस्थियां जमीन पर बिखरी पड़ी हैं। तमाम अस्थि कलश ऐसे भी हैं, जिन पर बनाई गई पहचान समय के साथ मिट चुकी है। ऐसे में जब इनके परिवार वाले आएंगे भी तो उन्हें अपने अस्थि कलश को पहचानना भी मुश्किल होगा। सिटी श्मशान भूमि के सुपरवाइजर त्रिलोकीनाथ शर्मा का कहना है कि इस समय पितृ पक्ष चल रहे हैं। अपने पितरों के तर्पण के लिए लोग घरों में श्राद्ध कर दान दे रहे हैं। मगर उनका मानना है कि जब तक किसी भी व्यक्ति का अस्थि विसर्जन नहीं होता, श्राद्ध पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से अपील की है कि श्राद्ध से पहले पितरों का अस्थि विसर्जन करें ताकि उनकी आत्मा को मुक्ति मिल सके।
अस्थियां लेने नहीं पहुंचते दूसरे जिलों के लोग
उन्होंने बताया कि इन दिनों तमाम कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार भी सिटी श्मशान भूमि पर हो रहे हैं। अधिकांश के परिजन उनकी अस्थियां ले गए। मगर बाहरी जिलों के संक्रमितों की मौत के बाद उनके परिवार वाले अस्थियां लेने नहीं आए। ऐसे में उन्हीं लोगों ने उनकी राख के साथ ही अस्थियाें को भी समेट दिया।
चिता में जल जाता है कोविड-19 वायरस
चिकित्सकों के मुताबिक वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि कोविड-19 वायरस 80 डिग्री तापमान होने पर नष्ट हो जाता है। चिता में करीब एक हजार डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान होता है। ऐसे में फूल में वायरस हो यह तनिक भी गुंजाइश नहीं है। लोगों को चाहिए कि वे चिता जलाने के दौरान भले ही वहां पर न रहें मगर फूल को जरूर सिराएं। बताया कि अगर फेंके गए फूल के कोई संपर्क में आता है तो वह भी संक्रमित नहीं होगा।