बरेली। विवाहिता की गला काटकर हत्या के दोषियों को सजा सुनाते वक्त अदालत ने कुछ अमर प्रेम कथाओं का हवाला दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि बाबा आदम या हजरत आदम को इस्लाम और ईसाई धर्म में मानव जाति का आदि पुरुष अर्थात प्रथम मानव माना जाता है। खुदा ने बाबा आदम के अकेलेपन को दूर करने के लिए हव्वा को उत्पन्न किया था। हव्वा ने खुदा की बात नहीं मानी तो दोनों को स्वर्ग से निकाल दिया गया था।
इसके बाद दोनों को पृथ्वी पर कष्ट झेलने पड़े, लेकिन बाबा आदम ने हव्वा को कुछ नहीं कहा। वह हव्वा से बहुत प्यार करते थे। ऐसी थी आदि पुरुष और आदि माता की प्रेम कहानी। अदालत ने लैला-मजनू, शीरी-फरहाद की कहानियों का भी जिक्र किया। कहा कि इस प्रकरण में दोषी मकसद अली ने बाबा आदम के आचरण के विपरीत जाकर अपनी ही पत्नी की दहेज के लालच में हत्या की है।
परिजन बोले- फांसी होने पर मिलेगा सुकून
नवाबगंज। मृतका की मां मुन्नी ने बताया कि मेरी बेटी दुनिया से चली गई। अब वह लौटकर नहीं आएगी, लेकिन उसके हत्यारों को सजा सुनाए जाने से तसल्ली मिली है। असली सुकून उस दिन मिलेगा, जिस दिन हत्यारे फंदे पर लटकाए जाएंगे। मृतका के भाई जावेद ने बताया कि हमें कोर्ट पर पूरा भरोसा था। हमें न्याय मिला है। संवाद