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Bareilly News: आतंकी इनामुल हक के घर पर ताला, किरायेदार भी खिसके, पड़ोसी खामोश

Fri, 15 Nov 2024 04:11 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने वाला इनामुल हक बरेली के कटघर मोहल्ले का रहने वाला है। आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने पर उसे 10 साल कारावास की सजा सुनाई गई है। 
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इनामुल हक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने पर दस साल की सजा पाने वाले इनामुल हक के कटघर मोहल्ला स्थित घर पर ताला पड़ा है। रात में किला पुलिस और दिन में मीडियाकर्मियों ने उसके घर पहुंचकर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने की कोशिश की तो लोग कुछ भी कहने से बचते दिखे। फेरी लगाने वाले किरायेदार भी वहां से खिसक लिए।

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अल कायदा व जाकिर मूसा के समर्थक आतंकी इनामुल हक व उसके साथी को एटीएस कोर्ट ने दस साल कैद की सजा सुनाई है। 18 जून 2020 को इनामुल को उसके कटघर मोहल्ला स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था। तभी से वह लखनऊ जेल में बंद है। 

अमर उजाला टीम कटघर मोहल्ले में उसके घर गई तो वहां ताला लगा मिला। पड़ोसी मुशीर खान ने बताया कि इनामुल के भाई फरीद उत्तराखंड के पंतनगर विवि में कर्मचारी हैं। उसका परिवार पंतनगर में ही रहता है। इनामुल का एक भाई मुनीर ही इस घर में आता-जाता रहता है। कपड़ों की फेरी लगाने वाले कुछ लोगों को छत का कमरा किराये पर दे दिया है। बताया कि रात में किला थाने से पुलिस आई थी। मुनीर तब भी नहीं मिला था। 

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मोबाइल फोन पर रहता था सक्रिय
इनामुल हक की गिरफ्तारी के वक्त पुलिस टीम ने उसके मकान के निचले हिस्से में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. रियाज व मोहल्ले वालों से लंबी पूछताछ की थी। सभी ने बताया था कि इनामुल किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता था और अधिकतर समय मोबाइल फोन चलाता रहता था। मोहल्ले वालों के मुताबिक इनामुल का नाम आतंकी संगठन से जुड़ने के बाद उन लोगों ने उसके घर से दूरी बना ली। 

डॉ. रियाज ने भी अपना क्लीनिक थोड़ी दूर स्थित अपने घर में शिफ्ट कर लिया। बताया कि इनामुल का भाई फरीद कभी बरेली नहीं आया। इनामुल की मां जरूर साल भर में एकाध बार यहां आती रही हैं। बताते हैं कि परिवार ने भी इनामुल से दूरी बना ली है और उसकी खास कानूनी पैरवी नहीं की। उन दिनों उसके भाई फरीद ने यह भी कहा था कि इनामुल परिवार में पैदा नहीं होता तो अच्छा रहता। 
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अंसार गजवत उल हिंद का सदस्य है इनामुल
इनामुल मारे गए आतंकी जाकिर मूसा का समर्थक है। बुरहान वानी की मौत के बाद मूसा ने हिजबुल मुजाहिदीन की कमान संभाली थी। बाद में मूसा को अंसार गजवत उल हिंद (अल कायदा की भारतीय शाखा) का चीफ बनाया गया था। इनामुल अल कायदा की इसी शाखा का सदस्य है। वह जाकिर मूसा को शहीद मानता है।

बरेली के एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि इनामुल के परिवार का कोई सदस्य बरेली में नहीं है। उसके परिवार के लोग पंतनगर में रहते हैं। यहां कुछ किरायेदार रहने की बात सामने आई है।

परिजनों ने भी भुगती सजा
देश के खिलाफ साजिश रचने और आतंकियों की भर्ती कराने का दोषी इनामुल हक धार्मिक उन्माद फैलाकर अपने मां और भाई तक को सलाखों के पीछे पहुंचा चुका है। इनामुल के पिता जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय में लैब तकनीशियन थे। उनकी मौत के बाद बड़े बेटे फरीदुल को विवि में कनिष्ठ लिपिक पद पर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति दी गई। परिवार सुखमय जीवन जी ही रहा था कि 11 सितंबर 2014 को इनामुल ने झा कॉलोनी स्थित धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ कर दी। 
इससे भड़के दंगे में लोगों ने दूसरे समुदाय की तीन दुकानें जला दीं। हालात इस कदर बिगड़े कि परिसर में कर्फ्यू लगाना पड़ा। इनामुल की करतूत की सजा उसके परिजनों और परिचितों को भुगतनी पड़ी। पुलिस ने उसके भाई फरीदुल और मां सहित तीन लोगों को जेल भेज दिया। फरीदुल को विवि की ओर से निलंबन तक झेलना पड़ा था। 

 
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