शाहजहांपुर। प्रथम फास्ट ट्रैक कोर्ट की अपर सत्र न्यायाधीश लवी यादव ने दुष्कर्म के एक मुकदमे में दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसी मुकदमे के एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुवायां क्षेत्र के एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 मई 2012 को उसकी बहन (17) को मोहल्ले का हरिप्रसाद उर्फ गंठा बहलाकर ले गया था। पीड़ित का आरोप था कि हरिप्रसाद की बहन ओमवती उसके दरवाजे पर आकर इशारा करके पीड़ित की बहन को अपने घर ले गई थी। 24 मई 2012 को पुलिस ने हरिप्रसाद उर्फ गंठा और ओमवती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।
विवेचना के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर हरिप्रसाद उर्फ गंठा के खिलाफ दुष्कर्म की धारा बढ़ाई थी। ओमवती के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366 का आरोप पत्र अदालत भेजा गया। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील संजीव कुमार सिंह के तर्कों को सुनने के बाद हरिप्रसाद उर्फ गंठा को दोषी पाया गया। उसे दस साल के कारावास की सजा सुनाई गई। साक्ष्य के अभाव में ओमवती को बरी कर दिया गया।