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छात्रा की आत्महत्या के दोषी को सजा: 'फोन में बिजी रहते हैं पुलिसकर्मी', कोर्ट की पुलिसिंग पर तल्ख टिप्पणी

Wed, 29 May 2024 05:34 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

याधीश ने अपने आदेश में कहा है कि छेड़खानी की घटना से परेशान होकर छात्राएं-महिलाएं आत्महत्या कर लेती हैं। उनका परिवार भी साथ नहीं देता। इस संबंध में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सार्वजनिक स्थान जैसे छात्राओं के स्कूल, पार्क, बाजार आदि में यदि पुलिस की ओर से पेट्रोलिंग की जाती तो शायद ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में सातवीं की छात्रा को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने वाले लोधी टोला के आलम को अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दस वर्ष कैद की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायाधीश ने पुलिसिंग पर तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा है कि अगर छात्राओं के स्कूल, पार्क, बाजार आदि जगहों पर पुलिस की ओर से सही से पेट्रोलिंग की जाती तो शायद ऐसी घटना नहीं होती।

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बारादरी के पुराना शहर निवासी आसिफ की पुत्री शबनूर (14) ने 27 सितंबर 2020 को फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आसिफ का आरोप था कि पड़ोसी आलम, शबनूर पर शादी करने का दबाव बनाता था। स्कूल आते-जाते समय परेशान करता था। बारादरी पुलिस ने इस संबंध में जांच के बाद 18 अक्तूबर 2020 को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। इस मामले में आलम की तरफ से उसके अधिवक्ता ने मुकदमा दर्ज होने में 21 दिन की देरी होने की बात कहते हुए आरोपों को गलत बताया था।

जिला शासकीय अधिवक्ता दिगंबर सिंह पटेल ने कहा कि आलम के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आलम को दोषी पाते हुए दस साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
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छात्रा के पिता आसिफ ने अदालत को बताया कि आलम छात्रा को धमकी देता था कि शादी कर ले वरना तेरे बाप को मार दूंगा। आलम के घर जाकर उसके मां-बाप से शिकायत की थी। तब घर वाले इसे हल्के में ले गए और कहा कि आलम को समझा देंगे, लेकिन आलम नहीं माना। वह छात्रा को परेशान करता रहा। इसके बाद दहशत की वजह से छात्रा ने स्कूल जाना बंद कर दिया था।

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'फोन देखने में व्यस्त रहते हैं पुलिसकर्मी' 
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा है कि छेड़खानी की घटना से परेशान होकर छात्राएं-महिलाएं आत्महत्या कर लेती हैं। उनका परिवार भी साथ नहीं देता। इस संबंध में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सार्वजनिक स्थान जैसे छात्राओं के स्कूल, पार्क, बाजार आदि में यदि पुलिस की ओर से पेट्रोलिंग की जाती तो शायद ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। स्कूल के बाहर पुलिस पेट्रोलिंग करती भी है तो ज्यादातर पुलिसकर्मी मोबाइल फोन देखने में व्यस्त रहते हैं। शबनूर का आत्महत्या करना पुलिस व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिह्न लगाता है।

न्यायाधीश ने इस आदेश की प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व अपर मुख्य सचिव (गृह) को भेजने के साथ लिखा है कि जहां छात्राएं व महिलाएं आती-जाती हैं, वहां महिला पुलिस बल को तैनात कर पेट्रोलिंग कराई जाए। एसएसपी समय-समय वीमेन पॉवर लाइन 1090, वीमेन सिक्योरिटी एप 1090, हेल्प लाइन 181, पिंक बूथ, मिशन शक्ति, एंटी रोमियो स्क्वॉड आदि के संबंध में जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हों।
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