फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: दस वर्ष बीते, पर नहीं दिया यूजीसी से जारी ग्रांट का हिसाब

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। बरेली कॉलेज को वर्ष 2013-14 में यूजीसी से 15 लाख और 19 लाख रुपये की ग्रांट मिली थी। यह रकम कॉलेज ने कहां खर्च की गई, इसका कोई हिसाब नहीं रखा। प्रकरण में अब यूजीसी ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अन्यथा की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विज्ञापन

नोटिस मिलने पर कॉलेज में खर्च का हिसाब जुटाया जा रहा है। बिल-वॉउचर आदि खोजे जा रहे हैं। प्राचार्य प्रो. ओपी राय के मुताबिक प्राप्त ग्रांट को शोध कार्य, उपचारात्मक कक्षा, शैक्षिक गोष्ठी समेत अन्य संसाधन पूरे करने में खर्च किया गया, पर उनका कोई रिकॉर्ड तैयार नहीं हुआ था। अब उन रिकॉर्ड को जुटाया जा रहा है, जिसे जल्द ही यूजीसी को भेज दिया जाएगा। बताया कि पूर्व में कॉलेज के ब्लैक लिस्ट होने की चर्चाएं थीं, पर पत्र जारी होने पर स्थिति साफ हुई कि कॉलेज ब्लैक लिस्ट नहीं है। ग्रांट का हिसाब न देने की वजह से कई वर्षों से कॉलेज को ग्रांट मिलनी बंद है।
प्राचार्य ने बताया कि पूर्व में भी यूजीसी ने ग्रांट के संबंध में खर्च का ब्योरा मांगा था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर शोध, सेमिनार आदि के लिए ग्रांट देना बंद कर दिया। यूजीसी अधिकारियों से संपर्क में हूं। जल्द ही उनके सभी सवालों के जवाब दिए जाएंगे। ग्रांट फिर शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन


मान्यता समाप्त होने की चर्चा गलत
प्राचार्य के मुताबिक ग्रांट का हिसाब न देने पर मान्यता समाप्त होने की चर्चा बिल्कुल गलत है। उन्होंने हिसाब मांगा है, वह उन्हें जवाब के साथ भेजा जाएगा। नियमानुसार पूर्व में ही ग्रांट संबंधी जानकारी साझा की जानी चाहिए थी, जो किन्हीं वजहों से नहीं की गई थी। अब तत्कालीन प्रभारियों से रिकॉर्ड मांगा गया है। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें