बरेली। हिंदी विषय में पारंपरिक पाठ्यक्रमों के अलावा फंक्शनल (प्रयोजनमूलक) हिंदी कोर्स विद्यार्थियों के लिए लीक से हटकर कॅरिअर की संभावनाएं खोल रहा है। शिक्षकों का दावा है कि ये कोर्स अन्य पारंपरिक पाठ्यक्रमों की तुलना में ज्यादा प्रभावी है।
बीते दिनों हिंदी भाषा में भी एमबीबीएस का कोर्स कराने की घोषणा कई राज्यों ने की। हिंदी शिक्षक अपने विद्यार्थियों के लिए इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि इससे कोष विज्ञान और अनुवादकों की नौकरी की संभावनाएं बढ़ेंगी।
फंक्शनल हिंदी के प्रवक्ता केतन कृष्ण ने बताया इस कोर्स में छात्रों को हिंदी भाषा के साहित्यिक ज्ञान के साथ उन्हें अलग-अलग सॉफ्टवेयर की भी जानकारी दी जा रही है। पॉडकास्ट का तकनीकी ज्ञान, ऑनलाइन डबिंग, रचनात्मक लेखन, कोष विज्ञान के बारे में बताया जा रहा है। ज्यादातर छात्रों को इस कोर्स के बाद नेट के लिए कोचिंग की आवश्यकता नहीं पड़ती।
ह्यूमेनिटी की विभागाध्यक्ष अनीता त्यागी ने बताया मंडल स्तर पर परास्नातक सिर्फ विश्वविद्यालय परिसर में ही कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कोर्स के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता की कमी है। कोर्स शुरू हुए तीन वर्ष होने के बाद भी बहुत कम छात्र प्रवेश के लिए आते हैं। संवाद
इसी वर्ष पाठ्यक्रम पूरा हुआ। मैंने साहित्य के साथ आज के समय की तकनीकी बारीकियां सीखी। इसके बाद शिक्षण और गैर शिक्षण दोनों क्षेत्रों में नौकरी देख रही हूं। - मोहिनी, छात्रा
मैं दूसरे सत्र में हूं। पहले साल पॉडकास्ट, डबिंग आर्टिस्ट कैसे काम करते हैं। इसका प्रैक्टिकल प्रशिक्षण लिया है। शिक्षकों का भी भरपूर सहयोग मिलता है। दीप्ति, छात्रा