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...क्योंकि तैनाती के खेल में अच्छी कीमत पर बिकते हैं ये स्कूल

Tue, 09 Dec 2014 08:41 PM IST
बरेली
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बेसिक शिक्षा विभाग में हर काम की खुली रेट लिस्ट है। यहां शिक्षकों की तैनाती के रेट तय हैं, निलंबन के बाद बहाली का रेट भी तय है और फर्जी स्कूल चलाने जैसे दूसरे अवैध कामों के भी। ताजा मामला शिक्षकों के प्रमोशन में चल रही काउंसिलिंग में घपलेबाजी का है। बाबुओं ने शिक्षकों को आवंटित किए जाने वाले स्कूलों की सूची से ऐसे 73 स्कूलों के ही नाम गायब कर दिए जो सड़क से सटे हैं या शहर से नजदीक होने के कारण जहां ज्यादा एचआरए दिया जाता है। मंगलवार को जीआईसी में काउंसिलिंग के दौरान यह खेल पकड़ में आया तो प्राथमिक शि7क के नेताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया। इसके बाद बीएसए को काउंसिलिंग रद्द करनी पड़ी। हालांकि तब तक दो सौ से ज्यादा शिक्षक काउंसिलिंग करा चुके थे। अब इन्हें बुधवार को दोबारा बुलाया गया है।
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काउंसिलिंग में किया जा रहा यह खेल तब खुला जब 617 शिक्षकों की वरिष्ठता सूची होने के बावजूद सिर्फ 544 विद्यालय की सूची प्रदर्शित की गई। प्राथमिक शिक्षक संघ के नेताओं ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेश पाल गंगवार ने इस दौरान खुलकर आरोप लगाया कि 73 स्कूलों का नाम इसलिए छुपाया गया है ताकि काउंसिलिंग के बाद शिक्षकों से घूस लेकर उन्हें उनका आवंटन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह खेल पटल लिपिक ने किया है और इस लिपिक को बीएसए का खुला संरक्षण हासिल है।
हंगामा बढ़ने लगा तो बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने सभी स्कूलों को काउंसिलिंग में शामिल करने का आश्वासन देते हुए मंगलवार की काउंसिलिंग निरस्त करने का ऐलान कर दिया। तय हुआ कि बुधवार को ये 73 स्कूल भी लिस्ट में शामिल करके नए सिरे से काउंसिलिंग कराई जाएगी। इसके लिए मंगलवार को काउंसिलिंग कराने वाले सारे शिक्षकों को दोबारा बुलाया गया है। बुधवार को जिन शिक्षकों की काउंसिलिंग पहले से तय थी, उनकी काउंसिलिंग अब बृहस्पतिवार को होगी। इस बीच प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय संगठन मंत्री हरीश बाबू शर्मा ने बीएसए से 50 फीसदी पदों पर विज्ञान शिक्षकों को प्रमोशन देने की मांग की। कहा कि इस काउंसिलिंग में शासनादेश का उल्लंघन किया जा रहा है।
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इंसेट...
महिलाओं-विकलांगों की हकमारी करने वाले थे
प्रमोशन से पहले सारे ब्लाकों से उन प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों के नाम की लिस्ट बीएसए दफ्तर मंगाई जाती है जहां शिक्षकों की जरूरत होती है। इसी आधार पर प्रमोशन के लिए रिक्त पद तय किए जाते हैं और काउंसिलिंग में पात्र शिक्षकों के लिए स्कूलों के नामों की लिस्ट रखी जाती है। विकलांग और महिला शिक्षकों को तो सुविधाजनक स्कूल दिए जाते हैं, बाकी स्कूलों को बीएसए आवंटित करते हैं। बीएसए दफ्तर में ब्लाकों से आई लिस्ट में शामिल वे स्कूल छिपा लिए गए जो ज्यादा एचआरए वाले या सड़क से सटे हुए हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उन्हें विकलांग और महिला शिक्षक विकल्प के रूप में न चुन सकें और उन्हें बाद में घूस लेकर दूसरे शिक्षकों को आवंटित कर दिया जाए।
शिक्षकों की काउंसिलिंग की खबर में वर्जन...
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काउंसिलिंग के दौरान जैसे ही संज्ञान में आया कि विद्यालय छूट गए हैं, वैसे ही उन्हें शामिल करके ही काउंसिलिंग कराने के निर्देश बीएसए को दे दिए। इस खामी के लिए जिम्मेदार कौन है, यह देखना बीएसए का काम है। - एनपी सिंह, प्राचार्य डायट एवं अध्यक्ष प्रमोशन कमेटी
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विद्यालय के नाम जानबूझकर छुपाए गए ताकि वह विकल्प के तौर पर न चुने जा सकें और बाद में उन्हें पैसा लेकर शिक्षकों का आवंटित कर दिया जाए। बीएसए दफ्तर में यह खेल हर साल होता है। -नरेश गंगवार, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
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