फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नए सिरे से तय होंगी टैक्स की दरें

Sun, 18 Dec 2016 02:41 AM IST
बरेली।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार और भाजपा की टैक्स विरोधी संघर्ष समिति की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद नगर निगम में टैक्स की दरें नए सिरे से रिवाइज होंगी। हालांकि  नगर निगम के अफसर पुरानी दरें लागू करने की बात कह रहे हैं। कौन सी पुरानी दरें लागू होंगी, ये अभी स्पष्ट नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश की कापी मिलने के बाद नया साफ्टवेयर अपडेट होने तक कर वसूली बंद कर दी गई है। हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए भी कानूनी राय ली जा रही है।
हाईकोर्ट से 2015 दरें निरस्त होने के बाद नगर निगम के अफसर टैक्स की पुरानी दरों की सूची 2014-15 को लागू करने पर विचार कर रहे हैं। अगर ये सूची फाइनल कर दी गई तो प्रत्येक करदाता पर 15 से 20 फीसदी तक टैक्स का बोझ़ बढ़ जाएगा। नगर निगम ने वर्ष 2011-12 की संशोधित दरों को तीन साल बाद 2014-15 में लागू किया गया था। इसका बड़े स्तर पर विरोध हुआ था। वर्ष 2015-16 में नगर निगम ने सर्किल रेट के आधार पर टैक्स की नई दरों को रिवाइज कर लागू कराया था। उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद कर निर्धारण को लेकर भ्रम की स्थिति है।
विज्ञापन


मनमाने तरीके से बढ़ीं दरें
शहर विधायक समेत आठ लोगों की याचिका पर न्यायालय ने कहा कि नगर निगम अधिनियम की धारा 174 के अंतर्गत नियमों का पालन करते हुए टैक्स की नई दरें निर्धारित कर सूची बनाए। न्यायालय में दायर याचिका के पैराग्राफ संख्या 16 और 17 में ये भी कहा गया कि नगर निगम बरेली ने 2001 से 2003, 2003 से 2005 और 2005 से 2007 और 2007 से 2009 तक जो टैक्स की रेट लिस्ट बनी थी, वह धारा 174 के तहत थी। वर्ष 2011-12 में टैक्स सूची की आपत्तियों पर दरें मनमाने तरीके से बढ़ा दी गईं। जिनका प्रकाशन 10 अप्रैल 2015 को किया गया। आपत्तियों पर सुनवाई के बाद अंतिम टैक्स दरों की सूची का प्रकाशन भी 2015 में किया गया।  

कोट
जनता को राहत देने के लिए नगर निगम टैक्स दरों को नए सिरे से रिवाइज कर सकता है। इसमें दरें कम होंगी या बढ़ेंगी। ये नगर निगम के ऊपर है। हाईकोर्ट ने 2015 की रेट लिस्ट निरस्त कर दोबारा सूची बनाने का निर्देश दिया है।
 -मलका मेहरी, जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल  


उच्च न्यायालय ने जनहित में निर्णय दिया है। अगर महापौर और नगर आयुक्त को न्यायालय का निर्णय अपने पक्ष में लगता है तो वह इसकी सार्वजनिक घोषणा करें कि वह सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे।
विज्ञापन

-डॉ. अरुण कुमार, विधायक शहर

उच्च न्यायालय के निर्णय का पूरा पालन किया जाएगा। वर्तमान दरों के पहले वाली टैक्स दरें लागू कर उनकी नई सूची बनेगी। इसमें टैक्स बढ़ेगा या घटेगा, इस पर कुछ नहीं कह सकते। इस प्रक्रिया में एक या दो दिन लग जाएंगे। फैसले पर कानूनी राय ली जा रही है।
 -शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें