जिले की सरकारी बैंकों में शुक्रवार को बुरा हाल रहा। कैश निकालने के लिए लोग एक बैंक से दूसरी बैंक में भटकते रहे लेकिन निराशा ही हाथ लगी। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा ने तो कैश कम होने के कारण अपनी शाखा के ग्राहकों को ही 10 हजार रुपये तक का भुगतान किया। किला स्थित स्टेट बैंक शाखा में दो घंटे के अंदर कैश खत्म हो गया तो लोगों ने जमकर हंगामा काटा। सड़क पर धरना देने बैठ गए। यही स्थित सैंमलखेड़ा स्थित ग्रामीण बैंक आफ बड़ौदा की रही। यहां पर आधा घंटे में ही कैश खत्म हो गया, आक्रोशित ग्राहकों में महिलाएं शाहजहांपुर रोड जाम कर सड़क पर बैठ गई। करीब आधा घंटे के बाद बारादरी थाने की पुलिस पहुंची। पुलिस ने महिलाओं को एक दो दिन में कैश मिलने का आश्वासन दिया, तब जाकर जाम खुला। बैंक अफसरों का कहना है कि शनिवार को भी और बुरी स्थिति हो सकती है। क्योंकि अधिकांश बैंकों के पास धनराशि नहीं है।
बैंकों की स्थिति यह है कि लोग निकासी तो कर रहे हैं लेकिन धनराशि जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि बैंकों के पास भी रिजर्व बैंक तथा अन्य बैंकों से करेंसी नहीं मिल रही है। अब तक बैंकों के पास रिजर्व में जो भी धनराशि थी, वह ग्राहकों को बांट दी।
स्टेट बैंक की मुख्य शाखा ने तो अपने ग्राहकों कोे दो से लेकर दस हजार रुपये तक का भुगतान किया। यहां तैनात अधिकारियों का कहना था कि करेंसी नहीं है। मौजूदा करेंसी अपने ही ग्राहकों को दे रहे हैं। शनिवार को भी धनराशि आने की कोई संभावना नहीं है। पीएनबी, बैंक आफ बड़ौदा, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स सहित दर्जनभर बैंकों की यही स्थिति रही है। इन बैंकों में भी कैश न होने के बोर्ड लगाकर शटर गिरा दिए गए। यह नजारा श्यामगंज, कालीबाड़ी, सेटेलाइट, राजेंद्र नगर, सिविल लाइन, सुभाषनगर, कुतुबखाना आदि स्थानों की बैंक शाखाओं का रहा है।
प्राइवेट बैंकों ने बांटी करेंसी, एटीएम भी चले
जिले की प्राइवेट बैंकों ने अपने ग्राहकों को 24-24 हजार रुपये तक का भुगतान किया। यहां की एचडीएफसी, आईसीआईसी, यश बैंक, एक्सिस बैंक में कैश लेने वालों की लाइन लगी रही। इन बैंकों के एटीएम भी चले। बैंक प्रबंधकों ने बताया कि उनके यहां रोडवेज, पेटेल पंप सहित बड़े प्रतिष्ठानों के खाते हैं। इसलिए उनके यहां प्रतिदिन कैश आ रहा है और निकासी भी हो रही है। किल्लत जरूर है लेकिन जरूरत के अनुसार लोगों को कैश दे रहे हैं।
ग्रामीण बैंक बंद
कैश न होेने के कारण जिले की 83 में से 70 बैंक बंद चल रही हैं। इन बैंकों को एक सप्ताह के लिए तीन से पांच लाख तक का कैश मिल रहा है। जो कि एक दिन में ही ग्राहकों को बंट जाता है। ऐसे में ग्रामीण बैंक के प्रबंधकों ने अपनी अपनी शाखाओं को बंद कर दिया है। प्रबंधकों का कहना है कि शाखाएं बंद नहीं करेंगे तो जनता हिंसक हो जाएगी।