बरेली। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वॉस) पर परखा जा रहा है। दिसंबर 2026 तक 76 आरोग्य मंदिरों के प्रमाणन का लक्ष्य है। फिलहाल, 47 आरोग्य मंदिरों के आवेदन राष्ट्रीय मूल्यांकन के लिए भेजे गए थे। इनमें से पांच अस्वीकृत हो गए। 28 केंद्रों को प्रमाणपत्र मिला है। 14 काे परिणाम का इंतजार है।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 381 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इनमें 178 केंद्रों का आंतरिक मूल्यांकन हो चुका है। 63 केंद्रों ने आंतरिक मूल्यांकन में 70 फीसदी, 48 केंद्र पुनर्मूल्यांकन या राज्य स्तरीय मूल्यांकन में 70 फीसदी से अधिक अंक हासिल कर चुके हैं। 47 आरोग्य मंदिर के आवेदन सक्षम (सक्षम) पोर्टल से राष्ट्रीय मूल्यांकन के लिए भेजे गए थे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी) की ओर से मूल्यांकन के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। दो अन्य आरोग्य मंदिरों का राष्ट्रीय मूल्यांकन जून-जुलाई में प्रस्तावित है। गुणवत्ता के मामले में नवाबगंज, फरीदपुर, रामनगर, भोजीपुरा, भमोरा के आरोग्य मंदिर आगे चल रहे हैं।
नवाबगंज सबसे आगे, बहेड़ी में शुरुआत का इंतजार
नवाबगंज में दस आरोग्य मंदिरों के एनक्वॉस प्रमाणन का लक्ष्य है। रामनगर में नौ, भोजीपुरा, भमोरा में आठ-आठ केंद्रों कतार में हैं। बहेड़ी का कोई केंद्र सूची में शामिल नहीं है पर चार केंद्रों ने आंतरिक मूल्यांकन में 70 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं। फरीदपुर के आठ और फतेहगंज पश्चिमी के सात केंद्रों ने आंतरिक मूल्यांकन में बेहतर प्रदर्शन किया है।
इन केंद्रों को मिला प्रमाण पत्र
महिला अस्पताल, तिलियापुर, विक्रमपुर, बादशाह नगर, रहपुरा, सिमेरा, जोखनपुर, रसुइया, वाहनपुर, मैनी, तराखास, बसई, रुस्तमनगर, मानपुर, अंजनी, सेंथल, नबीनगर, गौतारा, भरतौल, यूपीएचसी सीबीगंज, मढ़ीनाथ, पचपेड़ा, पिपरथरा, रहमानपुर, बलई, बेहटा बुजुर्ग, रायपुर हंस, सुभाषनगर।
वर्जन
एनक्वॉस प्रमाणन से केंद्रों में स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, मरीजों की मिलने वाली सुविधाओं, रिकॉर्ड प्रबंधन और इलाज की गुणवत्ता के बारे में पता चलता है। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सकेगा। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ