बरेली। पहले जहां मार्च में स्वाइन फ्लू के वायरस अक्रामक होते थे, वहीं इस बार इसने जनवरी में ही अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया। मौसम की बदली चाल और वायरस के बदलते स्वरूप ने इसे खतरनाक बनाया है। इसलिए इस बार वैक्सीन भी बहुत कारगर साबित नहीं होगी।
संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुबोध शर्मा का कहना है कि वैक्सीन जो जिला अस्पताल में चिकित्सकों को लगाई गई है या फिर अन्य लोग जो लगवा रहे हैं उनके लिए यह जानना जरूरी है कि यह बहुत कारगर नहीं है। इसलिए वैक्सीन लगाने के बावजूद भी सावधान रहें। वैक्सीन केवल एच1 एन1 वायरस का ही है। जबकि इस बार वायरस एच2 एन1, एच1 एन2 और एस2 एन3 जैसे 18 टाइप में आया है। कई चिकित्सकों ने वैक्सीन लगवाने से भी मना कर दिया है। उन्हाेंने बताया कि जिन्हाेंने नवंबर और दिसंबर में वैक्सीन लगवाया है उनके लिए भी यह ज्यादा असरकारक नहीं है। यह सभी 70 फीसदी ही लाभ दे रही है। मार्च में मौसम बदलने पर स्वाइन फ्लू के वायरस एक्टिव होते थे, लेकिन इस बार इसने अपने अनुकूल मौसम पाकर पांव पसार लिए हैं। हालांकि मंडल में अभी और मरीज नहीं मिले हैं। लखीमपुर की महिला को पहला स्वाइन फ्लू केस बताया जा रहा है, जो कहीं बाहर नहीं गई थी।
- रैपिड रिस्पांस टीम बनाई गई
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. वीपी भारद्वाज ने बताया कि रैपिड रिस्पांस टीम बना दी गई है। इसमें डॉ. अजय मोहन अग्रवाल, अंशुमान तिवारी, एसके सागर, एससी गुप्ता, यूवी सिंह, वीरेंद्र कुमार, सुनील यादव, दिग्विजय, लक्ष्मीकांत सक्सेना, एमएल शर्मा शामिल हैं। प्रभारी चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. एमएल शर्मा को बनाया गया है। अलग वार्ड बना दिया गया है। टेमी फ्लू पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, निजी अस्पतालाें को यह दी जाएगी। जिला अस्पताल में पूरा इलाज है। ये ही सैंपल लेंगे।