पुराना शहर के कांकरटोला निवासी एक व्यक्ति जयपुर (राजस्थान) में रहकर काम करता था। उसे टीबी रोग है, जिसका जयपुर में ही इलाज चल रहा था। पिछले दो सप्ताह से उसकी हालत ज्यादा खराब है। उसे तीन दिन पहले परिवारीजन बरेली ले आए और यहां रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया। स्वाइन फ्लू के लक्षण देख मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे दी। बुधवार को इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम प्रभारी डॉ. मीसम अब्बास ने मेडिकल कॉलेज जाकर संदिग्ध मरीज का सैंपल लिया। सैंपल लेने के बाद मरीज को टैमू फ्लू दवा खिला दी गई।
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वैसे तो वह टीबी का मरीज है। मगर स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे दी गई। स्वाइन फ्लू है या नहीं यह जांच रिपोर्ट आने पर तय होगा।
-- डॉ. अमित, रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज
मरीज का सैंपल ले लिया गया है, जिससे जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। मरीज को स्वाइन फ्लू की दवा खिला दी गई है।
डॉ. मीसम अब्बास, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम प्रभारी
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स्टाफ का वैक्सीनेशन कराएं
स्वाइन फ्लू के मरीज को आईसीयू या आईसोलेशन वार्ड में रखा जाता है। यहां काम करने वाले स्टाफ के संक्रमित होने का खतरा रहता है। डॉ. मीसम अब्बास ने बताया कि मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में आईसीयू व आईसोलेशन वार्ड के स्टाफ का वैक्सीनेशन करने को कहा गया है।
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डराएं नहीं, काउंसलिंग करें
एडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा का कहना है कि स्वाइन फ्लू से बचने को एहतियात जरूरी है। इसके संक्रमण से बचने के लिए सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर मरीजों व उनके परिजनों की काउंसलिंग करें। स्वाइन फ्लू के नाम पर लोगों को डराएं नहीं।
सैंपल रिपोर्ट का इंतजार
बरेली। मंगलवार को पीलीभीत बाईपास रोड स्थित एक निजी अस्पताल में संदिग्ध स्वाइन फ्लू होने मरीज की सूचना मिली। इंटीग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम टीम ने सैंपल लेकर लखनऊ भेजा था। टीम प्रभारी डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक सैंपल की जांच रिपोर्ट बुधवार रात तक हासिल नहीं हो सकी।