लाल फाटक पर ओवरब्रिज बनाने का मामला यूं तो ढाई दशक पुराना है। राजनीति में फंसी योजना एक बार फिर आगे बढ़ती नजर आ रही है। कैंट बोर्ड और स्थानीय सैन्य प्रशासन ने ओवरब्रिज बनाने की एनओसी रक्षा मंत्रालय से मांगी थी। अभी तक मंत्रालय ने कोई रुचि नहीं ली है। उधर, सरकार ने बजट भी जारी कर दिया है। नई सरकार बनते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ तो रक्षा अधिकारियों ने भी कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके तहत लाल फाटक पर ब्रिज बनाने के लिए सर्वे किया जाना तय हुआ है।
स्टेशन हेडक्वार्टर के एडम कमांडेंट कर्नल अमितवीर पांड्या ने बताया कि लाल फाटक की प्वाइंट टू प्वाइंट डिटेल रिपोर्ट बनाई जाएगी। रक्षा मंत्रालय द्वारा भूमि ट्रांसफर होने के बाद ही काम शुरू होगा। हालांकि बताया जा रहा है कि पूर्व की प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले पर जोरदार पैरवी न किये जाने से लाल फाटक का मामला अब तक लटका हुआ है। ओवरब्रिज बनाने के लिए जमीन खरीद करनी है, जिसका मूल्यांकन करने के लिए प्रदेश सरकार को रक्षा मंत्रालय में अपनी बात रखनी है। 28 अप्रैल को शुरू होने वाले सर्वे के बाद रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी। बता दें कि सेना के क्षेत्र में आने वाली किसी भी जमीन के लिए रक्षा मंत्रालय से आदेश लेना जरूरी है। बिना आदेश के कोई भी भूमि पर काम शुरू नहीं किया जा सकता है।
शहरी जाम दूर होगा
शहर अथवा पीलीभीत और लखनऊ दिशा से आने वाला ट्रैफिक लाल फाटक की ओर से गुजरने पर चौपला पर लगने वाला जाम आधा ही रह जाएगा। क्याेंकि चौपला ओवरब्रिज से जाने वाला ट्रैफिक करगैना के आगे दो फाटकों में फिर फंस जाता है। लाल फाटक पर भी दो रेल लाइनें हैं। सड़क बेहद संकरी है। दो तरफा ट्रैफिक निकलने में पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। यहां कई हादसे भी हो चुके हैं। ब्रिज न होने से इस क्षेत्र का विकास भी प्रभावित है। अगर सेना से सहयोग मिला तो निश्चित तौर पर शहर के लिए एक उपहार होगा।