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पर्सनल लॉ में तब्दीली का हक न हुकूमत को है, न उलमा को

Wed, 19 Apr 2017 01:36 AM IST
बरेली। 
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पर्सनल लॉ में तब्दीली का हक न हुकूमत को है, न उलमा को - फोटो : The right to change in the personal law is not to the government, nor to Ulama
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दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन जमात रजा मुस्तफा की विशेष बैठक में जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने साफ तौर पर कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक में एक नुक्ता भी बदलने की गुंजाइश नहीं है। यह अल्लाह का कानून है। हुकूमत और दुनिया के सारे उलमा मिलकर भी इस्लामी कानून में बदलाव नहीं कर सकते हैं। मौलाना असजद यहां दरगाह आला हजरत स्थित अजहरी मेहमानखाने में ‘तलाक की शरई हैसियत और मुस्लिम पर्सनल लॉ’ विषय पर संबोधित रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि शरीयत में बदलाव की नहीं, बल्कि लोगों को समझाने की जरूरत है। इसलिए इस्लामी कानून का मजाक न बनाएं। जिन हालातों में तलाक है उस पर बहस की जरूरत है। इस्लाम ने ही बेवाओं के निकाह का हुक्म दिया। यह बात भी गौर करने की है। इस दौरान खानकाह आलिया निजामिया बंदगी अमेठी शरीफ के सज्जादानशीन मौलाना कमर गनी उस्मानी ने कहा कि तीन तलाक मुल्क के लिए इतना बड़ा मसला नहीं है कि उस बहस की जाए। मुल्क में औरतों पर तरह-तरह जुल्म हो रहे हैं और उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा है। हुकूमत पहले उन औरतों को सुरक्षा दे। उनकी परेशानियां दूर करे। पूरे मुल्क में आज 4 करोड़ 20 लाख बेवा औरतें हैं। उनके लिए हुकूमत बहुत कुछ कर सकती है, मगर तीन तलाक को मुद्दा बनाया जा रहा है। जमात के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खां (सलमान मियां), खलील कादरी, मुफ्ती अफजाल रजवी, मौलाना नश्तर फारूकी. मौलाना शकील, नासिर कुरैशी, दानिश रजा, आबिद रजा, अतीक अहमद आदि मौजूद रहे। बैठक का संचालन कारी काजिम रजा ने किया।
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